
UCC में आदिवासियों को छूट की सिफारिश, 19 लाख सुझाव... जानिए संसदीय समिति की बैठक में पक्ष-विपक्ष ने क्या क्या कहा?
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संसदीय समिति की बैठक में लॉ कमीशन के अधिकारियों ने बताया कि 14 जून से आयोग ने UCC पर देशभर से सुझाव मांगे थे. अब तक 19 लाख सुझाव मिले हैं. 13 जुलाई तक लोग UCC पर अपने सुझाव भेज सकते हैं. संसदीय समिति की बैठक में कांग्रेस और डीएमके समेत ज्यादातर विपक्षी पार्टियों ने UCC के मुद्दे को लोकसभा चुनाव से जोड़ते हुए राय मांगने के समय पर सवाल उठाए. इस बैठक में 31 में से 17 सदस्य शामिल हुए.
देशभर में समान नागरिक संहिता (UCC) पर बहस जारी है. इसी बीच कानून मंत्रालय की संसदीय समिति ने सोमवार को अहम बैठक बुलाई. बैठक में शामिल होने वाले राजनीतिक दलों ने UCC पर अपनी अपनी बात रखी. इस दौरान जहां संसदीय पैनल के अध्यक्ष और भाजपा सांसद सुशील मोदी ने पूर्वोत्तर समेत देशभर के आदिवासियों को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के दायरे से बाहर रखने की वकालत की. तो वहीं, विपक्षी दलों ने लॉ कमीशन द्वारा UCC पर मांगे गए सुझाव के समय पर सवाल उठाया.
दरअसल, लॉ कमीशन ने पिछले महीने ही समान नागरिक संहिता पर धार्मिक संगठनों और आम जनता से राय मांगी थी. सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति की बैठक में कांग्रेस और डीएमके समेत ज्यादातर विपक्षी पार्टियों ने UCC के मुद्दे को लोकसभा चुनाव से जोड़ते हुए राय मांगने के समय पर सवाल उठाए. इस बैठक में 31 में से 17 सदस्य शामिल हुए. शिवसेना सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे पर चर्चा के समय पर सवाल उठाया, जबकि कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा और डीएमके सांसद पी विल्सन ने अलग-अलग लिखित बयान दिए, जिसमें कहा गया कि भावनात्मक मुद्दे पर नए सिरे से चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है. विवेक तन्खा ने लॉ कमीशन की पुरानी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता की इस स्तर पर कोई जरूरत नहीं है.
मॉनसून सत्र में UCC पर बिल ला सकती है मोदी सरकार वहीं, बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने आदिवासियों को किसी भी प्रस्तावित UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की और कहा कि सभी कानूनों में अपवाद हैं. बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि केंद्रीय कानून कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में उनकी सहमति के बिना लागू नहीं होते हैं. बीजेपी के सांसद महेश जेठमलानी ने UCC लागू करने की वकालत की. उन्होंने संविधान सभा में हुई बहस का हवाला देते हुए कहा कि इसे हमेशा अनिवार्य माना गया था. माना जा रहा है कि मोदी सरकार 20 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में UCC पर बिल ला सकती है. लॉ कमीशन को मिले 19 लाख सुझाव
संसदीय समिति की बैठक में लॉ कमीशन के अधिकारियों ने बताया कि 14 जून से आयोग ने UCC पर देशभर से सुझाव मांगे थे. अब तक 19 लाख सुझाव मिले हैं. 13 जुलाई तक लोग UCC पर अपने सुझाव भेज सकते हैं.
क्या है UCC?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का मतलब है, भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो. यानी हर धर्म, जाति, लिंग के लिए एक जैसा कानून. अगर सिविल कोड लागू होता है तो विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम होंगे.

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