
Sri Lanka: चीनी 290 रुपये तो चावल 500 रुपये किलो! सड़कों पर उतरे हजारों लोग
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श्रीलंका में शुक्रवार को हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने आर्थिक इमरजेंसी का ऐलान कर दिया. वहीं पाकिस्तान में राजनीतिक इमरजेंसी के हालात बन चुके हैं. राजपक्षे सरकार के राज में श्रीलंका इतना कंगाल हो चुका है..कि नौबत गृहयुद्ध की आ चुकी है. भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में सरकार के खिलाफ गुस्से का सैलाब आया है. श्रीलंका में खाने पीने की चीजों की इतनी भारी कमी हो गई है कि महंगाई अब हद से गुजर चुकी है. अब लोगों के पास ना खाने की हैसियत बची है..और ना खरीदने के पैसे. चीनी 290 रुपये किलो, चावल 500 रुपये किलो, 1 कप चाय 100 रुपये, ब्रेड का एक पैकेट 150 रुपये, 1 किलो दूध पाउडर की कीमत 1975 रुपये, एलपीजी सिलेंडर का रेट 4119 रुपये और पेट्रोल 254 रुपये लीटर मिल रहा है.

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.









