
Shekhar Suman ने बेटे अध्ययन संग Kangana Ranaut के रिश्ते पर की बात, बोले- वे दोनों खुश थे
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एक वक्त था जब कंगना और शेखर के बेटे अध्ययन सुमन रिश्ते में हुआ करते थे. जब दोनों का ब्रेकअप हुआ तो पब्लिक में उन्होंने एक दूसरे पर कीचड़ उछाला. बेटे के सपोर्ट में शेखर सुमन भी आए थे. अब शेखर ने एक बार फिर कंगना रनौत के बारे में बात की है. और अब उनके सुर बदले हुए हैं.
डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की ग्रैंड सीरीज 'हीरामंडी' में शेखर सुमन नजर आने वाले हैं. शेखर इस सीरीज में नवाब जुल्फिकार का किरदार निभा रहे हैं. हाल ही में अपने नए इंटरव्यू में शेखर सुमन ने एक्ट्रेस कंगना रनौत को लेकर बात की.
एक वक्त था जब कंगना और शेखर के बेटे अध्ययन सुमन रिश्ते में हुआ करते थे. दोनों की मुलाकात डायरेक्टर मोहित सूरी की फिल्म 'राज: द मिस्ट्री कन्टिन्यूज' के सेट पर हुई थी. वहीं से दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया. 2008 में दोनों का रिश्ते शुरू हुआ था और डेटिंग के एक साल बाद कंगना और अध्ययन का ब्रेकअप हो गया. ये ब्रेकअप इतना खराब था कि देशभर को दोनों के बीच की लड़ाई देखने को मिली. शेखर ने कंगना को बेटे के प्रति अब्यूसिव बताया था, तो वहीं अध्ययन का कहना था कि एक्ट्रेस ने उनपर काला जादू किया है.
शेखर ने कही ये बात
अब जूम से बातचीत में शेखर सुमन ने सालों बाद कंगना रनौत और अध्ययन सुमन के रिश्ते को लेकर बात की है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब दोनों के बीच कोई दुश्मनी और गिले-शिकवे नहीं हैं. शेखर ने कहा, 'हम सभी जिंदगी में अलग पड़ावों से गुजरते हैं. जो आज सही लग रहा है, वो शायद कल न लगे. कोई भी एक रिश्ता रखना, ब्रेकअप और फिर यूं ही आगे बढ़ जाना नहीं चाहता. हर कपल चाहता है कि उसका रिश्ता परमानेंट हो क्योंकि ये गहरा और पवित्र होता है.'
61 साल के शेखर सुमन ने अध्ययन और कंगना के टूटे रिश्ते का जिम्मेदार किस्मत को बताया. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंसान को अपने पुराने रिश्तों को प्यार भरी नजरों से ही देखना चाहिए. एक्टर ने कहा, 'भाग्य अलग रोल निभाता है और आपको उसे फॉलो करना होता है. कंगना और अध्ययन जब साथ थे खुश थे. और फिर वो अपने-अपने रास्ते चले गए. ये होना लिखा था तो उनके बीच अब कोई बुरी फीलिंग या दुश्मनी नहीं है. कभी-कभी गरमा-गर्मी में चीजें हो जाती हैं. लेकिन आपको पीछे पलटकर चीजों को प्यार से देखना चाहिए.'
जाने-माने कवि और लिरिसिस्ट रहे साहिर लुधियानवी की बात को भी यहां शेखर सुमन ने दोहराया. उन्होंने कहा, 'वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा.'













