
PAK पर बांग्लादेश मेहरबान! ढाका यूनिवर्सिटी में फिर से पढ़ने जाएंगे पाकिस्तानी छात्र
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बांग्लादेश का सबसे बड़ा शैक्षिक संस्थान ढाका विश्वविद्यालय में अब पाकिस्तानी छात्र एक बार फिर पढ़ाई कर सकेंगे. यूनिवर्सिटी की ओर से पाकिस्तानी छात्रों के एडमिशन पर लगाया गया बैन हटा दिया गया है. पाकिस्तान के छात्रों के लिए ढाका यूनिवर्सिटी में यह बैन करीब एक दशक साल पहले लागू किया था.
बांग्लादेश का सबसे बड़े शैक्षिक संस्थान ढाका विश्वविद्यालय ने पाकिस्तान से आने वाले छात्रों के लिए अपना दरवाजा एक बार फिर खोल दिया है. अब पाकिस्तानी छात्र वहां जाकर एक बार फिर पढ़ाई कर सकेंगे. यूनिवर्सिटी की ओर से पाकिस्तानी छात्रों के एडमिशन पर लगाया गया बैन हटा दिया गया है. पाकिस्तान के छात्रों के लिए ढाका यूनिवर्सिटी में यह बैन 10 साल पहले लगाया था.
यूनिवर्सिटी की प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर सायमा हक ने बताया कि 13 नवंबर को यूनिवर्सिटी के वीसी नियाज अहमद खान की अध्यक्षता वाली बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. नियाज अहमद खान ने बैठक में यह प्रस्ताव ढाका यूनिवर्सिटी संघ के सामने रखा जिसके बाद इसे सर्वसम्मति के साथ मंजूर कर लिया गया.
शेख हसीना के भारत जाने के बाद बांग्लादेश में चल रही मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की ओर से यह कदम पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत को सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाने की वजह से उठाया गया है. ढाका यूनिवर्सिटी की नई पॉलिसी के तहत अब पाकिस्तानी छात्रों को बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में दाखिल मिल पाएगा. इसके साथ ही बांग्लादेशी छात्र भी पाकिस्तान जाकर किसी भी कोर्स की पढ़ाई कर सकते हैं.
प्रोफेसर सायमा ने स्थानीय न्यूज चैनल से इस संबंध में आगे बताया कि, एक समय पर पाकिस्तान के साथ संबंध खत्म हो गए थे, लेकिन ढाका विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है. हमारे कई छात्रों को स्कॉलरशिप या शैक्षणिक सम्मेलनों के लिए पाकिस्तान जाने की जरूरत होती है. हमने सामान्य संबंधों को बहाल करने के लिए इस मुद्दे को चर्चा के माध्यम से हल किया है.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार बढ़ा रही पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ
आपको बता दें कि करीब 10 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान ढाका यूनिवर्सिटी ने पाकिस्तान के साथ शैक्षणिक संबंधों पर पूरी तरह बैन लगाया गया था. बीते 14 दिसंबर 2015 को ढाका यूनिवर्सिटी के उस समय वाइस-चांसलर रहे प्रोफेसर आरेफिन सिद्दीक की अध्यक्षता में ढाका यूनिवर्सिटी के संघ ने यह फैसला किया था.

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