
MCD स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव, एल्डरमैन का मनोनयन... SC और दिल्ली HC के फैसले से तय होगी तस्वीर
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एमसीडी के नए मेयर का चुनाव होने जा रहा है लेकिन सबसे पावरफुल स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों का चुनाव नहीं हो सका है. स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों के चुनाव पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टे लगा रखा है वहीं, आम आदमी पार्टी ने सरकार से राय लिए बिना एल्डरमैन नामित करने के एलजी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. दोनों ही मामलों में 24 अप्रैल को सुनवाई होनी है.
दिल्ली नगर निगम चुनाव के बाद अब अगले साल के लिए नया मेयर चुनने की बारी आ गई है. दूसरे साल के लिए नए मेयर का चुनाव 26 अप्रैल को होना है. एमसीडी के दूसरे मेयर का चुनाव होने जा रहा है लेकिन सबसे पावरफुल कमेटी स्टैंडिग कमेटी का गठन अभी तक नहीं हो पाया है. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (एएपी) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), दोनों ही दल एक-दूसरे के खिलाफ कोर्ट गए हैं.
ऐसे में दिल्ली की सियासी पिच और दोनों दलों की सियासी दिशा, कोर्ट के फैसले से तय होने वाले हैं. एएपी ने उपराज्यपाल (एलजी) की ओर से एमसीडी के 10 एल्डरमैन के मनोनयन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है. इस पर आज यानी 24 अप्रैल को सुनवाई होनी है. वहीं, बीजेपी के दो पार्षदों ने सदन से स्टैंडिंग कमेटी के लिए छह पार्षदों के री-इलेक्शन को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है.
बीजेपी पार्षदों की ओर से स्टैंडिंग कमेटी के छह पार्षदों के री-इलेक्शन को चुनौती देने वाली याचिका पर भी 24 अप्रैल को ही सुनवाई होनी है. सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं. दिल्ली हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के इन मामलों में फैसले दिल्ली नगर निगम के भविष्य की तस्वीर को तय करने वाले होंगे.
एएपी का क्या है दावा
एमसीडी में 10 एल्डरमैन के मनोनय को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की बेंच सुनवाई करेगी. अदालत ने 29 मार्च को याचिका पर एलजी से जवाब तलब किया था. एएपी के वकील ने एलजी के फैसले को चुनौती देते हुए दावा किया कि ऐसा चुनी हुई सरकार की राय लिए बिना किया गया है.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही दिल्ली में 22 फरवरी को मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो सका था. तब सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि ये एल्डरमैन सदन में मतदान नही करेंगे. दरअसल, एएपी ने अपनी याचिका का आधार दिल्ली नगर निगम के अधिनियम को बनाया, जिसमें उल्लेख है कि 25 साल से अधिक उम्र वाले उन लोगों को एल्डरमैन रखा जाना चाहिए जिन्हें निगम का विशेष ज्ञान या अनुभव हो. पिछली सुनवाई के दौरान एएपी के वकील ने चुनी हुई सरकार से राय नहीं लिए जाने को लोकतंत्र की हत्या करार दिया था.

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