
IPC Section 72: कई मामलों में से एक के लिए दोषी को सजा, ये है IPC की धारा 72 में प्रावधान
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आईपीसी (IPC) की धारा 72 (Section 72) में एक जैसे कई मामलों में शामिल दोषी को एक ही मामले में सजा दिए जाने की बात कही गई है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 72 इस संबंध में क्या प्रावधान किया गया है?
Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में जुर्म और उसकी सजा के प्रावधान (Provision) दिए गए हैं. साथ ही कानूनी मामलों की जानकारी भी दी गई है. ऐसे ही आईपीसी (IPC) की धारा 72 (Section 72) में एक जैसे कई मामलों में शामिल दोषी को एक ही मामले में सजा दिए जाने की बात कही गई है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 72 इस संबंध में क्या प्रावधान किया गया है?
आईपीसी की धारा 72 (IPC Section 72) भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 72 (Section 72) अनुसार, उन सभी मामलों में जिनमें यह निर्णय दिया जाता है कि कोई व्यक्ति उस निर्णय में विनिर्दिष्ट (specified in the judgment) कई अपराधों में से एक अपराध का दोषी (Guilty) है. किन्तु यह संदेह (Doubtful) रहता है कि वह उन सभी अपराधों में से किस अपराध का दोषी है, यदि वही दण्ड सब अपराधों के लिए उपबन्धित (Provided) नहीं है तो वह अपराधी को उस अपराध के लिए दण्डित (Punished) किया जाएगा, जिसके लिए कम से कम दण्ड (Punishment) उपबन्धित किया गया है.
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क्या होती है आईपीसी (IPC) भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

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