
IPC Section 147: दंगा करने वालों के लिए सजा का प्रावधान करती है धारा 147
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भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 के तहत बल्वा करने के लिए सजा का प्रावधान है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 147 इस बारे में क्या जानकारी देती है?
Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं में गैरकानूनी रूप से जमा भीड़ और उसके द्वारा किए जाने वाले अपराध (Offence) के साथ-साथ उनकी सजा (Punishment) का प्रावधान (Provisions) भी किया गया है. इसी प्रकार से आईपीसी की धारा 147 के तहत बल्वा करने के लिए सजा का प्रावधान है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 147 इस बारे में क्या जानकारी देती है?
आईपीसी की धारा 147 (Indian Penal Code Section 147) भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 147 (Section 147) में बल्वा करने वाले के लिए दंड (Punishment for rioting) का प्रावधान किया गया है. IPC की धारा 147 के अनुसार, जो कोई बल्वा करने का दोषी (Guilty of rioting) होगा, वह किसी भांति के कारावास से दंडित (Punished with imprisonment ) होगा, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकती है. या फिर उस पर आर्थिक जुर्माना (Monetary penalty) लगाया जाएगा. या फिर उसे दोनों प्रकार से दंडित (Punished) किया जाएगा.
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क्या होती है आईपीसी (IPC) भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.
अंग्रेजों ने लागू की थी IPC ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

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