
EXCLUSIVE: 99% चीजों पर '0' टैक्स, डेयरी, एग्रीकल्चर पर नो-डिस्काउंट... पीयूष गोयल ने गिनाए IND-EU डील के फायदे
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आजतक से खास बातचीत के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ से ज्यादा भारत को इस डील से फायदा होने वाला है. उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के मार्केट में हमे ज्यादा टैक्स लाभ होंगे.
बजट से ठीक एक दिन पहले आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ के साथ FTA डील के फायदे गिनाए. साथ ही रविवार को पेश होने वाले बजट में संभावित ऐलानों के बारे में विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए यूरोप के 27 देशों की तुलना में भारत को तुरंत और डायरेक्ट फायदा मिलने वाला है.
गोयल ने कहा कि ओभरऑल 99 फीसदी भारतीय प्रोडक्ट्स पर '0' टैक्स लगेगा. साथ ही लेबर इंटेंसिव (एक देश से दूसरे देश में सामान भेजना) सेक्टर में सबसे ज्यादा फायदा होगा. पहले दिन से ही अब कोई टैक्स नहीं देना होगा. इससे रोजगार बढ़ेगा, व्यापार बढ़ेगा और फैक्ट्रियां लगाने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. उन्होंने टाटा चेयरमैन के एक बयान को कोट करते हुए कहा कि भारत में 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां आएंगी और बड़े स्तर पर निवेश के रास्ते खुलेंगे.
सेंसिटिव सेक्टर के लिए नहीं खोला बाजार वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि FTA डील के तहत सबसे खास बात है कि संवेदनशील क्षेत्रों में यूरोप के लिए हमने मार्केट नहीं खोला है. डेयरी, अनाज, चावल,गेहूं, मक्का जैसी संवेदनशील चीजों के लिए टैक्स कम नहीं किया है और मार्केट नहीं खोला है.
सेब पर बहुत कम राहत दी अगर कोई छोटा-मोटा कोटा दिया भी है तो बड़ा ही सोच-समझकर दिया है जैसे सेब की बात करें तो आज भी 6 लाख टन सेब आयात होता है. इसपर 50 फीसदी एम्पोर्ट प्राइस है और 25 फीसदी इम्पोर्ट ड्यूटी है. ऐसे में हमने 75 फीसदी पहले ही अपने किसानों के लिए रिजर्व रखा है. सवा लाख टन यूरोपीय यूनियन पहले से ही एक्सपोर्ट करता है, ऐसे में हमने एक यूरोपीय यूनियन को एक छोटा सा कोटा दिया है.
अब सिर्फ 45 से 50 हजार टन ही सेब इम्पोर्ट होंगे, जो बाद में थोड़े-थोड़े करके बढ़ेंगे, लेकिन आज हो रहे हैं, उससे कम ही होगा. उसपर भी मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस 80 रुपये और 16 रुपये ड्यूटी रखी है यानी कि अब 96 फीसदी का प्रोटेक्शन हो गया है, जो 75 फीसदी की तुलना में ज्यादा है. तो एक तरीके से सोच-समझकर दी गई है.
यूरोपीय यूनियन हमारा कंम्पटिटर नहीं गोयल ने कहा कि हमारा और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था अलग-अलग चीजों पर निर्भर है. हम एक दूसरे के कंम्पटिटर नहीं हैं, जो चीजें हम उन्हें दे सकते हैं वे कभी बना ही नहीं पाएंगे और जो वहां से आएंगी, वह भारत की जरूरत हैं. ऐसे में संवेदनशील चीजों को इस डील से बाहर रखते हुए समझौता किया गया है.













