
Exclusive: हमले की 4 साल से तैयारी कर रहा था हमास, जानिए इजरायल पर अटैक की इनसाइड स्टोरी
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इजरायल और हमास के बीच जंग के दो हफ्ते होने वाले हैं. इस जंग में सैकड़ों की संख्या में लोग मारे जा चुके हैं. हजारों लोग घायल हैं. इस जंग का आगाज हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला करके किया था. हमास पिछले चार साल से हमले की तैयारी कर रहे थे. अब इजरायल इस जंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बेकरार है.
इजरायल ने गाजा की चौतरफा घेराबंदी कर दी है. सरहद पर अपनी सेना का सबसे बड़ा जमावड़ा कर रखा है. सैकड़ों टैंक और लाखों जवान सिर्फ आदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं. इससे पहले हवाई हमलों में सैकड़ों की संख्या में लोग मारे जा चुके हैं. हजारों घायल हैं. घर से बेघर हो चुके लोग खाने-पीने के लिए तड़प रहे हैं. इजरायल और हमास के बीच इस जंग का आगाज 7 अक्टूबर को हुआ था, जब हमास के आतंकियों ने इजरायल में घुसकर वहां के लोगों को मौत के घाट उतार दिया. कत्लेआम मचा दिया. इतना ही नहीं सैकड़ों बेकसूर लोगों को बंधक बनाकर अपने साथ गाजा ले आए. हमास का हमला इतना सुनियोजित और त्वरित था कि इजरायल को संभलने तक का मौका नहीं मिला. दरअसल, हमास इस हमले की तैयारी पिछले चार साल से कर रहा था. इसके लिए उसके आतंकियों को दक्षिण लेबनान में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था.
ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बदले खौफनाक हमला
साल 2020 में अमेरिकी सेना ने ईरानी आर्मी के एक बड़े अधिकारी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या कर दी थी. उनको ईरान का दूसरा सबसे ताकतवर शख्स माना जाता था. ईरान के सबसे ताकतवर नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के बाद जनरल कासिम सुलेमानी का ही स्थान था. लेकिन इराक की राजधानी बगदाद में एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी मिसाइल हमले में कासिम सुलेमानी को मार गिराया गया. इसमें पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज के डिप्टी कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस भी मारा गया. इस हमले में इजरायल ने अमेरिका की मदद की थी. उसके इशारे पर ही अमेरिका ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था. इसके बाद से ही ईरान इजरायल से बदला लेना चाहता था. फिलिस्तीनी चुनावों में हमास की जीत के तुरंत बाद इस हमले की योजना बनाई गई. इसके तहत हमास के 200 आतंकियों को हमले के लिए तैयार किया गया.
हमास-हिजबुल्लाह की मदद कर ईरान को क्या हासिल हुआ?
हमास के आतंकियों को दक्षिण लेबनान भेजा गया. वहां हिजबुल्लाह कमांडरों ने उन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षित किया. इन सबके पीछे कथित रूप से ईरान का हाथ माना गया है. उसने ही आधुनिक हथियार से लेकर पैसे तक मुहैया कराए हैं. हिजबुल्लाह और हमास का मुख्य उद्देश्य आईडीएफ पर ऐसा हमला करना था जिससे कि इजरायल और अमेरिका का मनोबल गिर जाए. साल 2021 में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की हार मिडिल ईस्ट में इजराइल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की इस साजिश को बढ़ावा देने वाली थी. इस तरह ईरान ने इजराइल पर 7 अक्टूबर के हमलों को अंजाम देने में हमास और हिजबुल्लाह की मदद करके दो मुख्य लक्ष्य हासिल किए हैं. पहला, इजराइल के खिलाफ अरब देशों को एकजुट करना. दूसरा, फिलीस्तीन के रुख पर इजरायली सेना और समाज को हतोत्साहित करके विभाजित करना.
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