
Exclusive: जानिए महायुद्ध की आहट के बीच कैसे 'हाई-टेक' जंग की तैयारी कर रहा ईरान
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ईरान पर लंबे समय से प्रतिबंध लगे हुए हैं लकिन इसके बावजूद ईरान कैसे अपनी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर काम कर रहा है. Aaj tak की टीम इस समय तेहरान में ये भी जानने के लिए पहुंची कि कैसे युद्ध के माहौल में यहां लगातार काम जारी है.
जब दुनिया महायुद्ध की धमकियों और ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों (Sanctions) की बात कर रही है, तब ईरान के भीतर क्या चल रहा है? क्या ईरान की तकनीक युद्ध के इस दबाव में दम तोड़ रही है या फिर खामोशी से अपनी ताक़त बढ़ा रही है? इन सवालों का जवाब देने के लिए आजतक की टीम इस समय ईरान की राजधानी तेहरान में मौजूद है.
आजतक ईरान के उस 'गुप्त' दिमाग तक पहुंचा है, जिसे 'परदिस इंटरनेशनल वैली' (Pardis Technology Park) कहा जाता है. ये ईरान की वो 'सिलिकॉन वैली' है, जहां प्रतिबंधों की परवाह किए बिना मिसाइलों से लेकर देश के नागरिक इको-सिस्टम तक के लिए हाई-टेक इनोवेशन किए जा रहे हैं.
दरअसल, ईरान पर दशकों से कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं. बैंकिंग से लेकर विमानों के कलपुर्जों तक के लिए ईरान को संघर्ष करना पड़ा है. लेकिन 'परदिस वैली' में पहुंचकर यह अहसास होता है कि इन पाबंदियों ने ईरान को रुकने के बजाय 'इनोवेट' करने पर मजबूर कर दिया है. यहां मिसाइल तकनीक से लेकर देश के सिविल इको-सिस्टम, हेल्थकेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है.
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मिसाइल से लेकर सिविल सिस्टम तक परदिस टेक्नोलॉजी पार्क ईरान का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां काम कर रहे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का विजन साफ है-तकनीकी गुलामी को खत्म करना. यहां उन्नत मिसाइल प्रोग्राम के लिए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर तैयार किए जा रहे हैं.
तेहरान में युद्ध की आहट है, इजरायल के साथ सीधे टकराव की स्थिति है, लेकिन इस सिलिकॉन वैली के भीतर माहौल बेहद अनुशासित और भविष्योन्मुखी माना जा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि जब दुनिया के रास्ते बंद होते हैं, तो लैब के रास्ते खुलते हैं. ईरान के लिए यह केवल एक पार्क नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

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ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान काअबक का सबसे बजड़ा हमला है. डिएगो गारर्सिया बोहद रणनीतिक सैन्य अड्डा है. B-52 बॉम्बर विमान, लंबी दूरी के हमले के हथियार इस बेस पर मौजूद है.

ईरान युद्ध के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग होकर काम कर रहा है. हालांकि यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी रणनीतिक रूप से साथ हैं और ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ की भूमिका निभा सकते हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग चल रहा है या रणनीति का हिस्सा है?

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