
Delhi: बढ़ती गर्मी तोड़ेगी बिजली खपत के सारे रिकॉर्ड, 8000 मेगावॉट के पार जा सकती है बिजली की डिमांड
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मार्च में ही मई-जून वाली गर्मी पड़ने लगी है. इस भारी तपिश के चलते एसी, कूलर, फ्रिज इत्यादि का इस्तेमाल बढ़ेगा और बिजली खपत भी पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी. अनुमान है कि बिजली की पीक डिमांड 8000 मेगावॉट के पार जा सकती है.
दिल्ली में बिजली कंपनियों ने अनुमान जताया है कि मार्च में ही मई-जून वाली गर्मी बिजली खपत के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी. बिजली की पीक डिमांड 8000 मेगावॉट के पार जा सकती है. पिछले साल शहर में पीक डिमांड 7323 मेगावॉट थी.
पिछले साल गर्मियों में बीआरपीएल क्षेत्र में बिजली की मांग 3118 मेगावॉट थी, जो इस साल 3500 मेगावॉट पहुंच सकती है. बीवाईपीएल इलाके में पिछले साल बिजली की पीक डिमांड 1656 मेगावॉट पहुंची थी, जो इस बार गर्मियों में 1800 मेगावॉट तक जा सकती है. BSES ने कहा कि बढ़ती डिमांड को देखते हुए बिजली की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है, ताकि आने वाली गर्मियों में दक्षिण, पश्चिम, मध्य और पूर्वी दिल्ली के 1.80 करोड़ निवासियों को पूरी बिजली मिले. लंबी अवधि के समझौतों के तहत केंद और राज्यों के पावर प्लांटों से मिलने वाली बिजली के अलावा, बीएसईएस को पावर बैंकिंग सिस्टम से भी 690 मेगावॉट बिजली मिलेगी. पावर बैंकिंग के तहत, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, गोवा, अरूणाचल प्रदेश और तमिलनाडु से बीएसईएस को बिजली मिलेगी. बीएसईएस के पास हरित ऊर्जा भी है. भारतीय सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (सेकी) की 600 मेगावॉट सौर ऊर्जा के अलावा, 300 मेगावॉट पवन ऊर्जा और कचरे से बनी 31 मेगावॉट बिजली बीएसईएस के पास उपलब्ध है. वहीं, घरों की छतों पर लगे रूफटॉप सोलर प्लांटों से मिलने वाली 126 मेगावॉट सौर ऊर्जा भी मौजूद है. सेकी की ओर से ही 210 मेगावॉट अतिरिक्त सौर ऊर्जा और 150 मेगावॉट अतिरिक्त पवन ऊर्जा भी बीएसईएस को मिलने लगेगी. बिजली की मांग का लगभग सटीक अनुमान लगाने के अत्याधुनिक तकनीकों के साथ ही मौसम का अनुमान लगाने वाली तकनीक भी शामिल है. लोड का लगभग सटीक अनुमान लगाने में तापमान, बारिश, बादल, हवा की गति, हवा की दिशा और उमस आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. बीएसईएस एडवांस्ड स्टैटिस्टिकल फोरकास्टिंग मॉडल्स, अत्याधुनिक वेदर फोरकास्टिंग सोल्यूशंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर रही है. इसमें आईएमडी-पॉस्को द्वारा उपलब्ध कराई गई विशेषज्ञता का भी उपयोग किया जा रहा है. बिजली की मांग का बेहतर अनुमान लगा पाने की क्षमता, उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति में काफी मददगार साबित होती है.

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