
2024 से पहले लिटमस टेस्ट... बिहार में महागठबंधन तो महाराष्ट्र में शिंदे गुट की होगी उपचुनावों में अग्निपरीक्षा
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बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा सहित छह राज्यों की 7 विधानसभा सीटों पर तीन नंवबर को उपचुनाव है. महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे-बीजेपी गठबंधन और उद्धव ठाकरे के बीच मुकाबला है तो बिहार में नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव से बीजेपी को दो-दो हाथ करना है. वहीं, हरियाणा में कुलदीप बिश्नोई की साख दांव पर होगी?
देश के छह राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव ऐलान के साथ सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है. महाराष्ट्र की अंधेरी ईस्ट सीट से लेकर बिहार की मोकामा-गोपालगंज, हरियाणा की आदमपुर, यूपी की गोला गोकर्णनाथ और ओडिशा की धामनगर विधानसभा सीट हैं. बिहार और महाराष्ट्र में हुए सियासी बदलाव के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं. ऐसे में महाराष्ट्र में शिंदे गुट-बीजेपी तो बिहार में नीतीश-तेजस्वी के लिए इसे 2024 का लिट्मस टेस्ट माना जा रहा है?
शिंदे गुट की पहली परीक्षा महाराष्ट्र की अंधेरी ईस्ट सीट पर चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा कर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है. शिवसेना में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े की लोकप्रियता की पहली परीक्षा तीन नवंबर को मुंबई की अंधेरी ईस्ट सीट पर होने वाले उपचुनाव में होगी. यह सीट शिवसेना विधायक रमेश लटके के निधन हो जाने से रिक्त हुई है.
अंधेरी ईस्ट सीट पर बीजेपी और शिंदे गुट ने मुंबई नगर निगम के पूर्व पार्षद मुरजी पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है तो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने दिवंगत रमेश लटके की पत्नी रुतुजा लटके को कैंडिडेट बनाने की संभावना है. एनसीपी अंधेरी ईस्ट सीट पर उद्धव ठाकरे के प्रत्याशी को समर्थन करेगी तो कांग्रेस ने अभी तक फैसला नहीं लिया. उद्धव और शिंदे-बीजेपी दोनों गुटों के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ गया, क्योंकि इसका परिणाम दोनों के अस्तित्व पर मुंहर लगाएगा. ऐसे में माना जा रहा है कि उपचुनाव नतीजा के असर बीएमसपी चुनाव पर पड़ेगा.
बिहार में नीतीश-तेजस्वी का टेस्ट बिहार में सियासी बदलाव के बाद पहली बार उपचुनाव हो रहे हैं. गोपालगंज और मोकामा सीट पर नीतीश-तेजस्वी सरकार की पहली परीक्षा तो बीजेपी के लिए इम्तिहान है. मोकामा सीट आरजेडी के विधायक रहे अनंत कुमार को दस साल की सजा होने के चलते रिक्त हुई है तो गोपालगंज सीट पर बीजेपी विधायक सुभाष सिंह के निधन से खाली हुई है. सियासी समीकरणों के लिहाज से मोकामा में महागठबंधन और गोपालगंज में बीजेपी मजबूत मानी जा रही है. ऐसे में बीजेपी और महागठबंधन के बीच यह चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है.
नीतीश कुमार के बीजेपी का साथ छोड़कर तेजस्वी यादव से हाथ मिलाने के बाद हो रहे दोनों सीटों पर उपचुनाव काफी रोचक माने जा रहे हैं. मोकामा अनंत सिंह का गढ़ रहा है और मतदाताओं के बीच लोकप्रिय है, लेकिन बिहार में बने नए समीकरण गोपालगंज सीट पर बीजेपी के लिए कठिन बना सकते हैं. माना जा रहा है कि गोपालगंज सीट पर बीजेपी से कुसुम देवी उतर सकती हैं. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के किसी नेता को संयुक्त उम्मीदवार बनाकर उतारने की तैयारी है. मोकामा सीट पर आरजेडी खुद चुनाव लड़ने की तैयारी में है और अनंत सिंह की पत्नि नीलिमा देवी को उम्मीदवार हो सकती है.
बिश्नोई परिवार की साख दांव पर होगी हरियाणा की आदमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है. यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई के इस्तीफा से खाली हुई थी. वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. माना जा रहा है कि उपचुनाव में कुलदीप बिश्नोई या फिर उनके बेटे भव्य बिश्नोई बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं. ऐसे में कांग्रेस मजबूत कैंडिडेट उतारने की तैयारी में है, जिसे लेकर पूर्व मंत्री संपत सिंह और मुक्केबाज विजेंदर सिंह में किसी एक पर दांव खेल सकती है. AAP सतेंद्र सिंह को उतार सकती है, जिन्होंने हाल ही में बीजेपी छोड़कर केजरीवाल का दामन थामा है.

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