
'2024 के ओलंपिक गेम्स में रूसी एथलीटों का हो बहिष्कार...', यूक्रेन का अभियान, जानें क्या बोला IOC
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पिछले हफ्ते अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने कहा था कि वह रूसी और बेलारूसी एथलीटों को खेलों में न्यूट्रल के रूप में शामिल करने के लिए ओपन है और क्वालीफायर में कंपीट करने के लिए उनके लिए दरवाजे खुले है. इसको लेकर कीव ने अंतरराष्ट्रीय अभियान छेड़ दिया है.
रूस की ओर से हमले झेल रहे यूक्रेन के खेल मंत्री वडिम हत्सैट ने मंगलवार को कहा कि देश को मॉस्को के आक्रमण के कारण 2024 में पेरिस ओलंपिक से रूसी और बेलारूसी एथलीटों पर प्रतिबंध लगाने के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की उम्मीद है. पूर्व ओलंपिक फेसिंग चैंपियन, 51 वर्षीय वडिम हत्सैट ने रॉयटर्स को बताया कि रूसी और बेलारूसी एथलीटों को खेलने करने की अनुमति देने का विचार अस्वीकार्य है. युद्ध में मारे गए एथलीटों के चित्रों के साथ एक दीवार के आगे खड़े होकर उन्होंने अपने कीव कार्यालय में कहा, "ऐसे समय में जब पूर्ण पैमाने पर युद्ध चल रहा है, जब हमारे एथलीट, हमारे सैनिक हमारी मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं, यह हमारे लिए असंभव है."
दरअसल, पिछले हफ्ते अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने कहा था कि वह रूसी और बेलारूसी एथलीटों को खेलों में न्यूट्रल के रूप में शामिल करने के लिए ओपन है और क्वालीफायर में कंपीट करने के लिए उनके लिए दरवाजे खुले है. इसको लेकर कीव ने अंतरराष्ट्रीय अभियान छेड़ दिया है.
'खेल के रूसी राजनीतिकरण का मतल आतंक का जस्टिफिकेशन'
इधर, मॉस्को ने मंगलवार को कहा कि वह अपने एथलीटों को ओलंपिक में भाग लेने की अनुमति देने के लिए आईओसी के किसी भी कदम का स्वागत करेगा. लेकिन घंटों बाद आईओसी ने कहा कि वह रूस के आक्रमण पर देशों के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों के साथ खड़ा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने मंगलवार को एक वीडियो संबोधन में कहा कि "खेल के रूसी राजनीतिकरण का मतलब निश्चित रूप से आतंक का जस्टिफिकेशन होगा".
'युद्ध में हुई 220 यूक्रेनी एथलीटों और कोचों की मौत'
हत्सैट ने कहा, युद्ध में ऐसे कम से कम 220 यूक्रेनी एथलीटों और कोचों की मौत हो गई है, जिन्होंने 1992 में तथाकथित यूनिफाइड टीम के लिए ओलंपिक फेसिंग टीम का स्वर्ण जीता था. उन्होंने कहा, "यूक्रेन कई देशों के साथ एकजुट होगा ... और रूसियों को ओलंपिक में अनुमति नहीं दी जाएगी." उन्होंने बताया, 40 देशों ने यूक्रेन के एथलीटों को युद्ध के दौरान विदेशों में आवास और प्रशिक्षण में सहायता दी थी. 'पदक से ज्यादा महत्वपूर्ण जीवन'

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