
15 साल पहले जब UPA के लिए संकटमोचक बना था अतीक, परमाणु समझौते पर ऐसे बची थी सरकार
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अतीक अहमद की हत्या के बाद अब उससे जुड़े कई किस्से सामने आ रहे हैं, जिनमें यह बात सामने आई है कि कैसे अतीक ने 2008 में यूपीए सरकार को गिरने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस समय अमेरिका के साथ परमाणु समझौता को लेकर यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था.
गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात को प्रयागराज मेडिकल कॉलेज के पास गोली मार कर हत्या कर दी गई. अतीक की हत्या के बाद अब उससे जुड़े कई किस्से सामने आ रहे हैं. 2008 में जब अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, तो उस वक्त अतीक अहमद ने जेल से बाहर निकलकर वोट डाला और सरकार बचाने में अहम भूमिका अदा की.
जब जेल से छोड़े गए थे 6 बाहुबली
यह दावा बाहुबलियों पर लिखी गई किताब में किया गया है. 2008 में एक दौर ऐसा आया जब जब अतीक समेत 6 आपराधिक राजनेताओं को महज 48 घंटों के अंदर अलग-अलग जेलों से रिहा किया गया था. 'बाहुबली' नामक एक किताब में दावा किया गया है कि, 2008 में जब मनमोहन सिंह सरकार अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर अविश्वास प्रस्ताव का संकट झेल रही थी तब अतीक अहमद ने सरकार बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी.
अतीक ने निभाई थी अहम भूमिका
राजेश सिंह द्वारा लिखित और रूपा पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक - "बाहुबलिस ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स: फ्रॉम बुलेट टू बैलट" नाम की किताब में दावा किया गया है कि इन छह बाहुबली सांसदों, जिन पर 100 से अधिक आपराधिक मामले थे, उन्हें अविविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से 48 घंटे पहले फर्लो पर जेल से बाहर निकाल दिया. अतीक अहमद भी इन सांसदों में से एक थे और तब वह फूलपुर से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद थे. इन सभी सांसदों ने यूपीए सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी.
यूपीए सरकार को चाहिए थे 44 वोट

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