
100 मामले दर्ज, अतीक को पहली बार सजा... उमेश पाल किडनैपिंग केस में उम्रकैद
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उमेश पाल 2005 में हुए राजूपाल हत्याकांड में मुख्य गवाह था. उमेश का 28 फरवरी 2006 को अपहरण हुआ था. इसका आरोप अतीक अहमद और उसके साथियों पर लगा था. प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अतीक समेत 3 को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. जबकि 7 को बरी कर दिया गया.
17 साल पुराने उमेश पाल अपहरण केस में आज प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने बाहुबली अतीक अहमद समेत 3 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. कोर्ट ने अपहरण के इस मामले में अतीक के अलावा हनीफ, दिनेश पासी को भी दोषी पाया है. कोर्ट ने तीनों पर 1- 1 लाख का जुर्माना भी लगाया. जबकि अतीक के भाई अशरफ समेत 7 को बरी कर दिया गया. अतीक पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, लेकिन पहली बार उसे किसी केस में सजा सुनाई गई.
उमेश पाल 2005 में हुए राजूपाल हत्याकांड में मुख्य गवाह था. कोर्ट का यह फैसला इसलिए काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उमेश की 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस मामले में भी अतीक, उसका भाई अशरफ, बेटा असद समेत 9 लोग आरोपी हैं. इससे पहले सोमवार को अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज लाया गया. उसके भाई अशरफ को बरेली से प्रयागराज लाया गया. इसके अलावा एक अन्य आरोपी फरहान को भी नैनी जेल लाया गया था.
165 से अधिक केस, 109 अंडरट्रायल, 13 में बरी... ये है अतीक अहमद एंड फैमिली की क्राइम कुंडली
25 जनवरी 2005 को हुई थी बसपा विधायक राजूपाल की हत्या
साल 2005 की बात है. जब बसपा विधायक राजू पाल की सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी. जब राजू पाल, उनकी पत्नी पूजा पाल और उमेश पाल बीएसपी में थे. जबकि अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ समाजवादी पार्टी में हुआ करते थे. साल 2004 में अतीक अहमद यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत कर सांसद बन चुके थे. इससे पहले वह इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक थे. लेकिन उनके सांसद बन जाने के बाद वो सीट खाली हो गई थी.
उमेश पाल किडनैपिंग केस में अतीक अहमद को दोषी ठहराने वाले जज कौन हैं? कुछ दिनों बाद उपचुनाव का ऐलान हुआ. इस सीट पर सपा ने सांसद अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ को अपना उम्मीदवार बनाया. इसी चुनाव में बसपा से राजू पाल को टिकट मिल गया और वो अशरफ के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए. चुनाव हुआ तो उन्होंने अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया और विधायक बन गए. अतीक और उसका परिवार उपचुनाव में मिली हार पचा नहीं पा रहा था. 25 जनवरी 2005 को राजूपाल की हत्या कर दी गई.

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