
'हमारी प्रगति में मिलेगी मदद...', भारत दौरे से लौटकर क्या बोले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू
AajTak
हाल ही में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया था. अब इसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि यह यात्रा मालदीव और क्षेत्र के लिए भी सफल रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को भी बुलाया गया था. समारोह में शामिल होने के बाद अब मुइज्जू ने अपना अनुभव शेयर किया है. मुइज्जू ने कहा है कि ईश्वर की इच्छा से दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों से मालदीव की समृद्धि बढ़ेगी.
चीन समर्थक रुख के लिए मशहूर मुइज्जू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए अपनी पहली भारत यात्रा के अंत में मीडिया से कहा कि यह यात्रा मालदीव और क्षेत्र के लिए भी सफल रही है.
पीएम का निमंत्रण पाकर हुई खुशी
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है. इस समारोह में भारत के पड़ोसी देशों और हिंद महासागर क्षेत्र के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया है. भारत आने से पहले मुइज्जू ने कहा था कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण पाकर बहुत खुशी हुई. वह शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल होकर भी उतना ही खुश नजर आए.
राष्ट्रपति के साथ भी की बैठक
मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा,'प्रधानमंत्री, मैं राष्ट्रपति (द्रौपदी मुर्मू)और विदेश मंत्री (एस जयशंकर) के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कर सका. इसके लिए मैं आभारी हूं. मुझे विश्वास है कि मजबूत द्विपक्षीय संबंध भविष्य में मालदीव के लिए आकांक्षाओं को और बढ़ाएंगे.'

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








