
सीरिया: दमिश्क में गरज रही है विद्रोहियों की तोपें, कब्जे के लिए हो रही खूनी जंग, विशेष विमान से भागे राष्ट्रपति अशद
AajTak
सीरिया वही देश है, जहां खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस ने अपने जड़ें जमाई थीं. अब एक बार फिर वैसा ही खतरा मंडरा रहा है. सीरियाई विद्रोहियों ने अब होम्स शहर पर कब्जा जमा लिया. कब्जा करने के बाद विद्रोहियों ने गोलियां चलाकर इसका जश्न मनाया.
सीरिया में हालाात विस्फोटक हो चले है. सीरियाई सेना कमजोर पड़ रही है और लड़ाके एक के बाद एक शहरों पर कब्जा करते चले जा रहे है और अब प्रमुख शहर होम्स पर कब्जा कर लिया है और अब दमिश्क की तरफ बढ़ गए हैं. खबर है कि दमिश्क पर भी विद्रोही सेना का कब्जा हो गया है. दमिश्क में विद्रोही कमांडर अपने तोप और साजो-समान सहित पहुंच गये हैं. स्थानीय शहरियों ने दावा किया है कि कई स्थानों पर कब्जे के लिए भीषण जंग चल रही है. कई जगह गन फायरिंग हो रही है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि राष्ट्रपति बशर अल-असद विशेष विमान में सवार होकर किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गए हैं.
वहीं दमिश्क अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दहशत और अराजकता का माहौल है. राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता जाने से आशंकित उनके वफादार देश से भागने की जद्दोजेहद में लगे हुए हैं.
हमा, अलेप्पो और दरा पर कब्जा करने के बाद होम्स चौथा प्रमुख शहर है जहां विद्रोहियों ने कब्जा जमा लिया है. जो वीडियो सामने आए हैं वो शहर पर कब्जे की कहानी को बयां कर रहे हैं. एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें प्रमुख शहर होम्स पर नियंत्रण के लिए सरकारी बलों से लड़ रहे सीरियाई विद्रोहियों के बीच गोलीबारी की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं और विद्रोही लड़ाके सड़कों पर दिख रहे हैं.
यह भी पढ़ें: सीरिया में तख्तापलट की कोशिश! कई शहरों पर विद्रोहियों ने किया कब्जा... सत्ता बचा पाएंगे राष्ट्रपति अल-असद?
विद्रोहियों ने गोलियां चलाकर मनाया जश्न केंद्रीय शहर से सेना के हटने के बाद हजारों होम्स निवासी सड़कों पर उतर आए और "असद चला गया, होम्स आजाद है" और "सीरिया अमर रहे, बशर अल-असद मुर्दाबाद" के नारे लगाते हुए जश्न मनाया. विद्रोहियों ने जश्न में हवा में गोलियां चलाईं, जबकि उत्साहित युवकों ने सीरियाई राष्ट्रपति के पोस्टर फाड़ दिए. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, जब विपक्षी लड़ाके राजधानी के उपनगरीय इलाकों में पहुंचे, तब 24 वर्षों तक देश के शासक रहे बशर असद का पता नहीं चल पाया था.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








