
सावरकर अंग्रेजों के पक्ष में होते तो छूटने के बाद भी उनकी जासूसी नहीं होतीः इतिहासकार डॉक्टर विक्रम संपत
AajTak
डॉ. विक्रम संपत ने सावरकर के बारे में बताया कि मेरे लिए सावरकर एक प्रखर राष्ट्रभक्त थे, एक क्रांतिकारी, समाज सुधारक जिन्होंने हिंदू समाज को संगठित किया. वह एक प्रखर योद्धा और वीर थे.
Agenda Aajtak 2021: 'एजेंडा आजतक' के कार्यक्रम में शनिवार को इतिहासकार डॉ. विक्रम संपत, चमन लाल और स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के रंजीत सावरकर ने हिस्सा लिया. नई दिल्ली में आयोजित किए गए कार्यक्रम में डॉ. विक्रम संपत ने कहा कि यदि सावरकर अंग्रेजों के पक्ष में होते तो छूटने के बाद भी उनकी जासूसी नहीं की जाती. इतिहासकार विक्रम संपत ने कहा कि साल 1911 में सावरकर पहली बार अंडमान की जेल में जाते हैं. उन्हें बेसिक सहूलियत तक नहीं दी गई थी. दिनभर उन्हें कोल्हू के बैल का टास्क दिया जाता था कि 30 पाउंड का तेल निकालना है और फिर उसे चेक किया जाता था. अगर तय मात्रा में नहीं निकला तो उन्हें खाना नहीं दिया जाता.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









