
साइड बिजनेस नहीं, फुल टाइम काम बन चुका PAK में आतंकवाद, इस्लामिक देशों तक फैला जहर, कहां से आता है फंड?
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पाकिस्तान इकनॉमी में भले लाख पीछे रहे लेकिन क्रॉस-बॉर्डर टैररिज्म में बहुत आगे निकल चुका. वहां के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल में माना था कि टैरर फैलाने में उनके देश का बड़ा हाथ रहा. इस्लामाबाद से केवल भारत ही नहीं, बल्कि इस्लामिक देशों तक भी आतंकी पहुंच रहे हैं. लेकिन कई इस्लामिक मुल्क तो पाकिस्तान के साथ रहे. तो क्या ये देश अपनी ही थाली में छेद किए बैठा है?
भारत का नाम सुनते ही पाकिस्तानी आबादी और खासकर सत्ता को एड्रेनलिन रश हो जाता है. वो सारे दुखदर्द भूलकर इसी में जुट जाती है कि कैसे हमारे देश को धक्का पहुंचाया जाए. आजादी के बाद से ही ये देश कश्मीर में आतंकियों को प्लांट करता रहा. इस्लामाबाद के आतंकी मंसूबे भारत तक ही सीमित नहीं, वो इस्लामिक मुल्कों को भी परेशान करता रहा. इसके लिए उसकी जमीन पर कई आतंकी गुट तैयार हो चुके.
अक्सर हम सोचते हैं कि मुस्लिम देश आपस में भाईचारा रखते होंगे, लेकिन पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी ISI ने मजहब को ही हथियार बना कर दूसरों के घर में आग लगाई. उसने कई इस्लामिक देशों तक आतंकी नेटवर्क फैला रखा है, जिसमें हमसाया अफगानिस्तान भी शामिल है.
तालिबान इसी का ब्रेन चाइल्ड
सत्तर के दशक के आखिर में जब सोवियत संघ (अब रूस) ने काबुल पर चढ़ाई की तो यूएस और सऊदी अरब ने पाकिस्तान का सहारा लिया. वहां की खुफिया एजेंसी ISI ने जिहादी लड़ाकों को ट्रेनिंग दी, हथियार दिए, और अफगानिस्तान भेजा ताकि वो रूसियों से लड़ सकें. इस जंग ने ISI के मुंह पर खून लगा दिया. रूस चला गया तब भी वो खेल को आगे बढ़ाता रहा.
यहीं तालिबान का बीज पड़ा, जिसने अफगानिस्तान को लोकतांत्रिक देश से कट्टरपंथी बना दिया. तालिबान सीधे-सीधे पाकिस्तान का क्रिएशन था. अब भले ही गुरु-चेले में दूरियां आ गई हों, लेकिन पाकिस्तान दूसरे तरीकों से अफगानिस्तान को परेशान कर रहा है.
शिया देश ईरान से लगा डर

अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग का आज 25वां दिन है. एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की हलचल तेज हुई है, तो दूसरी तरफ सैन्य हमले भी थम नहीं रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के ऊर्जा और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर 5 दिन हमला ना करने का दावा किया लेकिन अब IRGC ने दावा किया है कि ईरान के 2 ऊर्जा ठिकानों को फिर से निशाना बनाया गया. इस बीच इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और उसके बाद कहा कि ईरान और लेबनान पर हमले जारी रहेंगे. इजरायल लगातार लेबनान में हिज्बुल्ला के ठिकानों को निशाना बना रहा है. इस हमलों के बीच ये युद्ध भीषण रूप लेता जा रहा है. जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बेहद मजबूत बातचीत हुई है और करीब करीब सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई है. उन्होंने ये भी कहा है कि विटकॉफ और कुश्नर बातचीत कर रहे हैं. अगर इसी तरह बातचीत चली तो युद्ध खत्म हो सकता है. ट्रंप दावा कर रहे हैं कि मजबूत बातचीत रही लेकिन ईरान का कहना है कि कोई बातचीत नहीं हुई जब ट्रंप से पूछा गया कि विटकॉफ और कुशनर किससे बातचीत कर रहे हैं तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि हम उस व्यक्ति से बात कर रहे हैं, जिसे मैं सबसे अधिक सम्मानित और नेता मानता हूं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो नेता ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खुमेनेई हैं तो ट्रंप ने कहा कि नहीं- वो सुप्रीम लीडर नहीं है, हमें ये भी नहीं पता कि वो जीवित हैं या नहीं.

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