
समंदर से भी गहरी है दोस्ती... 74 साल में अमेरिका दे चुका है इजराल को 305 बिलियन डॉलर की मदद
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अमेरिकी रक्षा विभाग के हथियारों की बिक्री के आंकड़ों से पता चलता है कि 1950 से 2022 तक, इजरायल ने कुल 53 बिलियन डॉलर के अमेरिकी हथियार खरीदे, जिससे यह ग्लोबल स्तर पर शीर्ष प्राप्तकर्ताओं में से एक बन गया, जो सऊदी अरब के बाद दूसरे पायदान पर है.
इजरायल-ईरान जंग में अमेरिका इजरायल के साथ खड़ा है. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग की है और यहां तक कि ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला खामेनेई को साफ तौर से धमकी दी है. यह आर्थिक और सैन्य दोनों तरह से पिछले कुछ साल से इजरायल को अमेरिका की तरफ से मिलने वाले सपोर्ट के जैसा ही है. अमेरिकी विदेशी सहायता डेटाबेस के मुताबिक, इजरायल को 1951 से अमेरिकी सहायता मिल रही है. शुरुआत में सहायता पूरी तरह से आर्थिक थी.
साल 1951 में, इजरायल को अमेरिका से आर्थिक दायित्वों के रूप में केवल 0.96 मिलियन डॉलर मिले. यह सहायता 1950 के दशक और 1960 के दशक की शुरुआत में जारी रही, जो औसतन 0.4 और 0.6 बिलियन डॉलर सालाना थी. इस अवधि के दौरान सैन्य सहायता अनुपस्थित या नगण्य रही.
1970 के दशक की शुरुआत में एक बदलाव शुरू हुआ. साल 1971 में, सैन्य सहायता तेजी से बढ़कर 3.20 बिलियन डॉलर हो गई, जबकि आर्थिक सहायता 0.33 बिलियन डॉलर थी. साल 1974 तक, योम किप्पुर युद्ध के बाद, सैन्य सहायता बढ़कर 12.45 बिलियन डॉलर हो गई, जिसने आर्थिक सहायता को पीछे छोड़ दिया, जो 0.26 बिलियन डॉलर पर बनी रही.
साल 2008 के बाद, आर्थिक सहायता करीब खत्म हो गई. इसके उलट, सैन्य सहायता स्थिर रही. साल 2009 में 3.29 बिलियन डॉलर, 2010 में 3.83 बिलियन डॉलर और 2020 के दशक तक सालाना 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा पर जारी रही.
साल 2024 में, सैन्य सहायता 6.64 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जबकि आर्थिक सहायता सिर्फ़ 0.01 बिलियन डॉलर थी. कुल मिलाकर 1951 और 2024 के बीच, इज़रायल को अमेरिका से कुल 305.5 बिलियन डॉलर मिले हैं, जिनमें से 221.68 बिलियन डॉलर मिलिट्री फंडिंग और 83.8 बिलियन डॉलर आर्थिक सहायता थी. सैन्य सहायता इज़रायल को दी गई कुल सहायता का 72 फीसदी से ज्यादा है.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

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