
सद्दाम हुसैन के केमिकल बम की तरह कोरी कल्पना तो नहीं है ईरान का परमाणु बम?
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मार्च 2003 में अमेरिका ने ब्रिटेन के सहयोग से इराक पर हमला कर दिया था. उसका कहना था कि इराक के पास रासायनिक हथियार हैं और वो परमाणु बम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. लेकिन इसके कोई सबूत नहीं मिले कि इराक के पास रासायनिक हथियार हैं. अब 20 सालों बाद लगभग वही कहानी दोहराई जा रही है और इस बार निशाना है ईरान.
मार्च में अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने देश की खुफिया एजेंसियों के हवाले से अमेरिकी संसद में कहा था कि ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा है. इसके बाद जब मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से गबार्ड के इस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि 'उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि गबार्ड क्या कहती हैं, सच बात ये है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब पहुंच गया है.'
गुरुवार रात इजरायल ने ईरान पर जो हमला किया, उसके पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बताया जा रहा है. इजरायल का कहना है कि ईरान परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम संवर्धित कर चुका है और वो जल्द ही परमाणु बम बना लेगा. लेकिन ईरान इजरायल के इस दावे को हमेशा खारिज करता रहा है. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है.
ईरान अमेरिका के साथ एक परमाणु समझौता वार्ता भी कर रहा था जिसमें उससे मांग की जा रही थी कि वो अपना यूरेनियम संवर्धन छोड़ दे और संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने दे. ईरान ने इससे साफ इनकार कर दिया था जिससे वार्ता कमजोर पड़ी और फिर इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया था.
लेकिन इन सबके बीच जो सबसे बड़ा सवाल सामने है वो ये कि क्या सच में ईरान परमाणु बम बनाने के करीब पहुंच गया था या फिर ये बस अमेरिका की कोरी कल्पना है जिसका तर्क देकर उसने इराक पर हमला कर उसे तबाह कर दिया था.
अमेरिका का कहना था कि तत्कालीन सद्दाम हुसैन की सरकार ने खतरनाक रासायनिक और जैविक हथियारों का जखीरा जमा कर लिया है और फिर इराक पर हमला कर दिया गया. हालांकि, इराक में रासायनिक हथियार का कोई सबूत नहीं मिला था.
पहले तुलसी गबार्ड और अब IAEA के प्रमुख ने नकारी परमाणु हथियार की थ्योरी

अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग का आज 25वां दिन है. एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की हलचल तेज हुई है, तो दूसरी तरफ सैन्य हमले भी थम नहीं रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के ऊर्जा और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर 5 दिन हमला ना करने का दावा किया लेकिन अब IRGC ने दावा किया है कि ईरान के 2 ऊर्जा ठिकानों को फिर से निशाना बनाया गया. इस बीच इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और उसके बाद कहा कि ईरान और लेबनान पर हमले जारी रहेंगे. इजरायल लगातार लेबनान में हिज्बुल्ला के ठिकानों को निशाना बना रहा है. इस हमलों के बीच ये युद्ध भीषण रूप लेता जा रहा है. जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बेहद मजबूत बातचीत हुई है और करीब करीब सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई है. उन्होंने ये भी कहा है कि विटकॉफ और कुश्नर बातचीत कर रहे हैं. अगर इसी तरह बातचीत चली तो युद्ध खत्म हो सकता है. ट्रंप दावा कर रहे हैं कि मजबूत बातचीत रही लेकिन ईरान का कहना है कि कोई बातचीत नहीं हुई जब ट्रंप से पूछा गया कि विटकॉफ और कुशनर किससे बातचीत कर रहे हैं तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि हम उस व्यक्ति से बात कर रहे हैं, जिसे मैं सबसे अधिक सम्मानित और नेता मानता हूं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो नेता ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खुमेनेई हैं तो ट्रंप ने कहा कि नहीं- वो सुप्रीम लीडर नहीं है, हमें ये भी नहीं पता कि वो जीवित हैं या नहीं.

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