
'संकट में भारत ने की थी मदद...', मालदीव के विक्ट्री-डे पर चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति को आई 'ऑपरेशन कैक्टस' की याद
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ऑपरेशन कैक्टस चलाकर मालदीव में तख्तापलट की कोशिश नाकाम करने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिली थी. अमेरिका तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने भारत की कार्रवाई की सराहना की थी. तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने भारत का आभार जताया था.
मालदीव के चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम ने सोमवार को भारत की सराहना करते हुए 1988 में भाड़े के विदेशी सैनिकों द्वारा चुनी गई सरकार के तख्तापलट को नाकाम करने में दिल्ली की मदद को याद किया. उन्होंने 'विक्ट्री डे' के मौके पर कहा कि 3 नवंबर मालदीव के सैनिकों की वीरता के साथ-साथ जरूरत के समय भारत की मदद की याद दिलाता है.
यह द्वीपीय राष्ट्र 3 नवंबर को 'विक्ट्री डे' के रूप में सेलिब्रेट करता है. वर्ष 1988 में 3 नवंबर को देश के इतिहास में सबसे घातक आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को सत्ता से बेदखल करने के लिए हमला किया गया था. तख्तापलट की इस असफल कोशिश में मालदीव के 19 नागरिक मारे गए थे, जिनमें 8 सैनिक थे. दर्जनों अन्य घायल हुए थे.
भारत ने चलाया था ऑपरेशन कैक्टस
मालदीव में 1988 में तख्तापलट का प्रयास श्रीलंकाई और मालदीव के कुछ समूहों द्वारा किया गया था, जिनका नेतृत्व व्यवसायी अब्दुल्ला लुथुफी कर रहे थे. तख्तापलट की इस कोशिश में श्रीलंका के एक तमिल अलगाववादी संगठन, पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम (PLOTE) के सशस्त्र लड़ाके अब्दुल्ला लुथुफी की सहायता कर रहे थे. भारत ने ऑपरेशन कैक्टस चलाकर मालदीव की चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयास विफल कर दिया था.
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संकट की इस घड़ी में मौमून अब्दुल गयूम ने भारत से मदद मांगी थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने 9 घंटे के अंदर हवाई और समुद्री मार्ग से पैरा कमांडो भेजकर तख्तापलट की कोशिश को नाकाम कर दिया था. भारतीय नौसेना ने मालदीव छोड़कर भाग रहे भाड़े के विदेशी सैनिकों को एक मालवाहक जहाज पर पकड़कर मालदीव के हवाले कर दिया था.

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