
शावेज के उत्तराधिकारी मादुरो की विचारधारा क्या है... सत्ता मिली लेकिन आर्थिक मोर्चे पर फेल रहा वेनेजुएला
AajTak
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की राजनीतिक यात्रा लेफ्ट विचारधारा के प्रभाव शुरू हुई. लेकिन जब उन्हें वेनेजुएला की सत्ता मिली तो उनकी आर्थिक नीतियां देश को तबाही के गर्त में ले गई. ऐसे मौके आए जब वेनेजुएला के लाखों लोगों को खाने के लिए भोजन नहीं मिल रहा था. लोग रोटी के लिए सड़कों पर लड़ रहे थे.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का पॉलिटिकल करियर 40 साल पहले शुरू हुआ था. 1986 में वह एक साल की आइडियोलॉजिकल ट्रेनिंग लेने के लिए क्यूबा गए. ये हाई स्कूल के बाद उनकी एकमात्र फॉर्मल एजुकेशन थी. क्यूबा से लौटने के बाद मादुरो की जिंदगी ने मोड लिया और राजधानी काराकस के सबवे सिस्टम में वे बस ड्राइवर बन गए.
क्यूबा की कम्युनिस्ट व्यवस्था में ट्रेनिंग लेने वाले अपने देश आकर जल्द ही एक यूनियन लीडर बन गए. 1990 के दशक में वेनेजुएला की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने उन्हें क्यूबा सरकार से करीबी संबंध रखने वाले एक लेफ्टिस्ट रेडिकल के तौर पर पहचानती थी.
बात आगे बढ़ती है. वेनेजुएला में वाम लहर चल रही थी. आंदोलन और अनशन आम बातें थी. इसी दौरान 4 फरवरी 1992 को लेफ्टिनेंट कर्नल ह्यूगो शावेज ने कार्लोस आंद्रेस पेरेज की सरकार के खिलाफ तख्तापलट किया. ह्यूगो शावेज वेनेजुएला के एक और 'क्रांतिकारी' थे.
सरकार बदलने की ये कोशिश असफल रही और शावेज गिरफ्तार कर लिए गए.
मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई...
मादुरो पर लेफ्ट का प्रभाव था और वे शावेज की विचारधारा के समर्थक थे. उन्होंने ह्यूगो शावेज की रिहाई के लिए अभियान चलाया और वामपंथी विचारधारा के प्रखर आवाज बनकर उभरे. तब उनकी भावी पत्नी सिलिया फ्लोरेस शावेज की लीगल टीम में थीं और युवा वकील थी.

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने कहा है कि FBI, DEA, अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के साझा ऑपरेशन में मादुरो को अमेरिकी हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई ड्रग तस्करी और उससे जुड़े आपराधिक मामलों में चल रही कानूनी कार्रवाई के तहत की गई है.

इस समां दुनिया में कहीं युद्ध चल रहा है तो कहीं युद्ध की तैयारी चल रही है. देशों के अंदर ही गृहयुद्ध जैसे हालात बन रहे हैं. रूस-यूक्रेन जंग को करीब 1400 दिन हो चुके हैं. चीन-ताइवान में भी तनी हुई है. पश्चिम एशिया में हर दिन किसी ना किसी मोर्चे पर जंग की आहट है. दुनिया के कई देशों का भविष्य भी बड़े देशों की इसी खींचतान में फंसा है. देखें ये स्पेशल शो.

एशेज टेस्ट के पहले दिन सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में बॉन्डी बीच हमले के हीरो अहमद अल अहमद को खड़े होकर सम्मान दिया गया, जिन्होंने 14 दिसंबर 2025 को अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जान बचाई थी. चोटिल हाथ के साथ मैदान पर उतरे अहमद अल अहमद के लिए ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दोनों टीमों ने गार्ड ऑफ ऑनर बनाया और पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा.

अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके पूरी दुनिया को सन्न कर दिया. निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया को आधी रात में अमेरिका लाया गया. अमेरिकी सेना का विमान न्यूयॉर्क के स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस पर उतरा. कड़ी सुरक्षा के बीच मादुरो को प्लेन से उतारा गया. प्लेन से उतरते वक्त वो लंगड़ाते दिखे. ट्रंप इस अभियान को बड़ी जीत बता रहे हैं. अब अमेरिका में मादुरे पर मुकदमा चलाने की तैयारी है. देखें विशेष.

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद दुनिया दो खेमों में बंट गई है. रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान अमेरिकी कार्रवाई के विरोध में हैं, जबकि फ्रांस और इजरायल जैसे देश ट्रम्प के समर्थन में हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रूस और चीन की निंदा नीति ट्रम्प पर कोई प्रभाव डाल पाएगी. इसके अलावा सवाल यह भी है कि क्या ट्रम्प आगे किसी अन्य विरोधी देश पर भी कब्जा कर सकते हैं?

तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'बांग्लादेश में जिहाद के दो अलग रूप हैं. मदरसों से निकले और विश्वविद्यालयों में पढ़े-लिखे, दोनों की सोच भारत-विरोध को साझा लक्ष्य मानती है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत-बांग्लादेश के सांस्कृतिक रिश्ते टूटे तो कट्टरता को बढ़ावा मिलेगा. नफरत और हिंसा के बजाय संवाद, संस्कृति और शांति की मौजूदा हालात में समाधान है.'







