
वीडियोकॉन से 11 लाख में मिल गया 5.3 करोड़ का फ्लैट, सीबीआई ने कोर्ट को दी जानकारी
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वीडियोकॉन को लोन मामले में सीबीआई ने दिसंबर 2022 में बड़ा एक्शन लेते हुए ICICI बैंक की पूर्व MD और CEO चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि जब चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक की कमान संभाल रही थीं, तब उन्होंने वीडियोकॉन ग्रुप को लोन दिया था. बदले में चंदा के पति दीपक कोचर की कंपनी नू रिन्यूएबल को वीडियोकॉन से निवेश मिला था.
ICICI बैंक की पूर्व MD और CEO चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के मामले में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि चंदा कोचर ने बैंक के पैसे का गलत इस्तेमाल कर खुद को फायदा पहुंचाया है. उन्होंने 64 करोड़ रुपये अवैध तौर पर हासिल किए हैं. सीबीआई के मुताबिक इस रकम को वीडियोकॉन की अलग-अलग कंपनियों के जरिए न्यूपावर रिन्यूएबल लिमिटेड में निवेश की आड़ में ट्रांसफर किया गया. बता दें कि न्यूपावर का स्वामित्व चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के पास है. एजेंसी ने कोर्ट को यह जानकारी दी है.
सीबीआई ने अप्रैल 2023 में 3250 करोड़ रुपये की कथित ऋण धोखाधड़ी घोटाले में चंदा कोचर उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के खिलाफ 11,000 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी. विशेष लोक अभियोजक ए लिमोसिन ने सीबीआई के मामले में दलील दी कि चंदा कोचर ने अन्य आरोपियों के साथ साजिश रची थी और अयोग्य वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को ऋण देने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया.
26 अगस्त 2009 को चंदा कोचर की अध्यक्षता वाली आईसीआईसीआई बैंक के निदेशकों की समिति ने वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को एक ऋण स्वीकृत किया था. ऋण 7 सितंबर को एलॉट किया गया. लिमोसिन ने कहा कि कोचर के ट्रस्ट को भी 2016 में चर्चगेट में सीसीआई चैंबर्स में वीडियोकॉन समूह से सिर्फ 11 लाख में एक फ्लैट मिला था, जबकि उस समय इसकी कीमत 5.3 करोड़ थी. कोचर के बेटे ने नवंबर 2021 में उसी इमारत में उसी मंजिल पर 19.11 करोड़ में एक फ्लैट खरीदा था.
कोचर को दिसंबर 2022 में किया था गिरफ्तार
वीडियोकॉन को लोन मामले में सीबीआई ने दिसंबर 2022 में बड़ा एक्शन लेते हुए ICICI बैंक की पूर्व MD और CEO चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि जब चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक की कमान संभाल रही थीं, तब उन्होंने वीडियोकॉन ग्रुप को लोन दिया था. बदले में चंदा के पति दीपक कोचर की कंपनी नू रिन्यूएबल को वीडियोकॉन से निवेश मिला था. हालांकि, दोनों को बाद में जमानत मिल गई थी.
जानकारी के मुताबिक 2012 में वीडियोकॉन ग्रुप को ICICI बैंक द्वारा लोन दिया गया था. जो बाद में एनपीए हो गया और बाद में इसे "बैंक फ्रॉड" कहा गया. सितंबर 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने दीपक कोचर को गिरफ्तार किया था. दरअसल, 2012 में, चंदा कोचर के नेतृत्व में आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन ग्रुप को 3,250 करोड़ का लोन दिया और छह महीने बाद वेणुगोपाल धूत के स्वामित्व वाली मेसर्स सुप्रीम एनर्जी ने मैसर्स न्यूपावर रिन्यूएबल्स को 64 करोड़ का लोन दिया, जिसमें दीपक कोचर की 50% हिस्सेदारी है.

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