
विमान हादसे की जांच में इस इलेक्ट्रोनिक डिवाइस का होता है अहम रोल, जानें क्या होता है ब्लैक बॉक्स?
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ब्लैक बॉक्स हवाई जहाज के पिछले हिस्से में लगा वो उपकरण होता है, जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर स्टोर होता है. इसकी जांच ये साफ हो जाता कि हादसे से ठीक पहले विमान की हालत क्या थी? अचानक क्या गड़बड़ी हुई? और पायलट विमान की हालत को लेकर क्या बातें कर रहे थे?
Kathmandu Plane Crash: काठमांडू एयरपोर्ट पर हुए प्लेन क्रेश ने पूरे नेपाल को दहला कर रख दिया. सौर एयरलाइंस को वो विमान टेकऑफ होते ही क्रेश कर गया. इस हादसे में 18 लोगों की जान चली गई. हालांकि पायलट ने किसी तरह बाहर निकलकर जान बचा ली. लेकिन वो गंभीर रूप से घायल है. अब विमान के ब्लैक बॉक्स की जांच भी की जा रही है. असल में जब-जब इस तरह के हादसे होते हैं, तो इन हादसों की जांच में प्लेन के ब्लैक बॉक्स का खास रोल होता है. क्योंकि हादसे से ठीक पहले क्या हुआ था, ये सब ब्लैक बॉक्स के ज़रिए पता चल जाता है.
विमान के पिछले हिस्से में होता है ये उपकरण ब्लैक बॉक्स हवाई जहाज के पिछले हिस्से में लगा वो उपकरण होता है, जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर स्टोर होता है. इसकी जांच ये साफ हो जाता कि हादसे से ठीक पहले विमान की हालत क्या थी? अचानक क्या गड़बड़ी हुई? और पायलट विमान की हालत को लेकर क्या बातें कर रहे थे?
क्या होता है ब्लैक बॉक्स? तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ये ब्लैक बॉक्स होता क्या है और कैसे काम करता है? ब्लैक बॉक्स असल में वो इलेक्ट्रोनिक डिवाइस है, जो प्लेन के पिछले हिस्से में लगा होता है. इसका नाम बेशक ब्लैक बॉक्स हो, लेकिन ये काला नहीं बल्कि नारंगी रंग का होता है. ब्लैक बॉक्स को नारंगी रंग का बनाए जाने के पीछे भी एक अहम वजह होती है. हादसे के बाद अगर के ब्लैक बॉक्स कहीं झाड़ियों में, कीचड़ में या धूल मिट्टी में भी गिरा हुआ हो, आसानी से नजर आ जाता है.
ब्लैक बॉक्स से निकलती हैं खास तरंगें ब्लैक बॉक्स को इस तरह से बनाया जाता है, जिससे ये बेहद ऊंचे तापमान यानी अगल लगने की हालत में खराब ना हो और पानी में पड़े होने पर भी इस पर कोई असर ना हो. बल्कि हादसे के बाद ब्लैक बॉक्स से लगातार कई घंटों तक एक खास किस्म की आवाज और तरंगें निकलती हैं, जिससे ये कहीं भी पड़े होने पर इसे ढूंढा जा सकता है. यहां तक कि गहरे पानी में भी.
ब्लैक बॉक्स के होते हैं दो भाग ब्लैक बॉक्स में आम तौर पर दो हिस्से होते हैं- फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर. और जैसा कि इनके नाम से ही साफ है, एक हिस्सा फ्लाइट से जुडे तथ्यों को दर्ज करता रहता है. मसलन अगर कोई तकनीकी खराबी हुई, तो क्या हुई? जब हादसा हुआ तो विमान के अंदर का तापमान कितना था, ये कितनी ऊंचाई पर उड़ रहा था, किधर मुड़ रहा था?
सारी बातचीत रिकॉर्ड करता है कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर जबकि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में आम तौर पर कॉकपिट में मौजूद लोगों की आखिरी 25 घंटों की बातचीत कैद होती है, जिससे पता चलता है कि आखिर हादसे के वक्त पायलट, को-पायलट या केबिन क्रू वालों के बीच क्या और कैसी बातचीत चल रही थी? कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में पायलट, कॉकपिट, टावर से कम्युनिकेशन और पैसेंजर अनाउंसर की आवाजें रिकॉर्ड होती हैं. कई बार इस बातचीत से ही हादसे की वजह काफी हद तक समझ में आ जाती है.

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