
'लोकतंत्र के इतिहास का शर्मनाक अध्याय', बांग्लादेश चुनाव के नतीजों पर बोलीं शेख हसीना
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शेख हसीना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 12 फरवरी को बांग्लादेश की जनता ने जिस चुनाव प्रक्रिया को देखा, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा.
बांग्लादेश के 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव और जनमत संग्रह के बाद राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने चुनाव प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सुनियोजित और लोकतंत्र विरोधी करार दिया है. उन्होंने चुनाव को रद्द करने, अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के इस्तीफे और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है.
शेख हसीना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 12 फरवरी को बांग्लादेश की जनता ने जिस चुनाव प्रक्रिया को देखा, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुनाव जनता की राय को सामने लाने के लिए नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रशासनिक हस्तक्षेप और आंकड़ों में हेरफेर के जरिए सत्ता बनाए रखने का प्रयास था.
हसीना ने कहा कि वर्तमान अंतरिम प्रशासन के तहत आयोजित यह चुनाव एकतरफा और अवैध था, जिसने जनता के मतदान अधिकारों को छीन लिया.
18 करोड़ लोगों के अधिकार छिनने का आरोप
अवामी लीग प्रमुख ने दावा किया कि इस चुनाव से देश की लगभग 18 करोड़ आबादी के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए हैं. उन्होंने कहा कि जनता की सबसे बड़ी मांग अब यही है कि इस चुनाव को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए. उन्होंने अंतरिम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा शासन लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं कर रहा और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रहा है.
अपने बयान में शेख हसीना ने राजनीतिक बंदियों की रिहाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और अन्य पेशेवर वर्गों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिससे लोकतांत्रिक वातावरण कमजोर हुआ है.

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