
लासित बोरफुकान, सुहेलदेव, केम्पेगोड़ा, अल्लूरी... नैरेटिव की सियासी जंग में नए नायक तलाशती BJP
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बीजेपी की कोशिश इतिहास के पन्नों में गुम उन नायकों की कहानियां सामने लाने की है जिनके बारे में देश को ज्यादा जानकारी नहीं है. उत्तर प्रदेश के इतिहास से सुहेलदेव, कर्नाटक की कहानियों में बसे केम्पेगोड़ा, राजस्थान के भील नायक गोविंद गुरु ऐसे ही नाम हैं. मुगलों को शिकस्त देने वाले असम के अहोम राजा लासित बरफुकान को इसी सूची में शामिल किया जा रहा है.
दिल्ली में शुक्रवार को पीएम मोदी ने अहोम साम्राज्य के सेनानायक वीर लासित बोरफुकान की 400वीं जयंती पर अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ गुलामी का इतिहास नहीं है, भारत का इतिहास योद्धाओं का इतिहास है विजय का इतिहास है. उन्होंने कहा कि हमारे देश की कहानी अत्याचारियों के विरुद्ध अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम दिखाने की कहानी है.
पीएम ने कहा कि आजादी के बाद भी हमें वही इतिहास पढ़ाया गया तो गुलामी के काल में साजिश के तहत रचा गया था. उन्होंने कहा कि जब हमें स्वतंत्रता मिली तो जरूरत इस बात की थी कि हमें गुलाम बनाने वाले विदेशी एजेंडे को बदला जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया. हमें ऐसा बताया गया जैसे हम हमेशा से पीटने, लुटने और मरने वाले लोग रहे.
लासित बोरफुकान को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश के हर कोने में वीर बेटे बेटियों ने आक्रांताओं का मुकाबला करते हुए अपना जीवन समर्पित कर दिया. लेकिन इस इतिहास को जानबूझकर दबाया गया.
नया नैरेटिव बनाने की कोशिश
दरअसल पीएम मोदी नैरेटिव की लड़ाई में एक ऐसा नैरेटिव तैयार करने की कोशिश में हैं जिसके केंद्र में वे भूले-बिसरे नायक हैं जो कई कारणों ने इतिहास के दस्तावेजों में दर्ज नहीं हो पाए. राजस्थान से आंध्र तक, यूपी से कर्नाटक तक बीजेपी ऐसे नायकों को सामने ला रही है और उनकी जिंदगी और साहस की कहानियों को जनता को सुना रही है. इन नायकों में पिछले 1000 सालों के वो योद्धा शामिल हैं जिनका देश के अलग अलग भागों में तत्कालीन समाज पर व्यापक प्रभाव था.
लासित बोरफुकान

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