
'लहसुन गलती से खा लिया तो जा सकती है जान...' वैम्पायर डिजीज से जूझ रही महिला की अनोखी कहानी
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32 साल की फीनिक्स नाइटिंगेल अमेरिका के मिनेसोटा में रहती हैं. उन्हें एक दुर्लभ बीमारी 'एक्यूट इंटरमिटेंट पोरफिरिया' है, जिसे 'वैम्पायर डिजीज' भी कहा जाता है. अपनी जिंदगी के बारे में बताते हुए वह कहती हैं- मैं हर दिन इस बीमारी से जुड़ी तकलीफ सहती हूं. लोग इसे वैम्पायर के साथ भी जोड़ते हैं.
कल्पना कीजिए, ऐसी एक बीमारी के बारे में जिसमें लोग लहसून से दूरी बना लेते हैं. लहसून का नाम सुनते ही उनमें सिहरन पैदा हो जाती है. ऐसी ही एक बीमारी है 'वैम्पायर डिजीज,' जिसके लक्षण अजीबोगरीब होते हैं. इसको 'वैम्पायर डिजीज' इसलिए भी कहा जाता है, क्योंकि इससे जूझने वाले शख्स के लक्षण वैम्पायरों की कहानी को याद दिलाते हैं.
डेली स्टार में ऐसी ही बीमारी से संघर्ष करती महिला की आपबीती बताई गई है, जो जितनी दर्दनाक है, उतनी ही डराने वाली भी है.
32 साल की फीनिक्स नाइटिंगेल अमेरिका के मिनेसोटा में रहती हैं. उन्हें एक दुर्लभ बीमारी 'एक्यूट इंटरमिटेंट पोरफिरिया' है, जिसे 'वैम्पायर डिजीज' भी कहा जाता है. अपनी जिंदगी के बारे में बताते हुए वह कहती हैं- मैं हर दिन इस बीमारी से जुड़ी तकलीफ सहती हूं. लोग इसे वैम्पायर के साथ भी जोड़ते हैं. इसके पीछे एक ऐसी कहानी है, जहां वैम्पायर लहसून को देखते ही तड़पने लगता है. मेरा हाल भी उस कहानी के वैम्पायर जैसा ही है. लहसून मेरे लिए जहर है. अगर गलती से मैंने खा लिया, तो मेरी जान भी जा सकती है.
इसके अटैक का दर्द लेबर पेन से भी ज्यादा होता है
फीनिक्स का कहना है कि वह 480 से ज्यादा बार इस खतरनाक अटैक से गुजर चुकी हैं. सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि ये अटैक कभी भी और कहीं भी हो सकते हैं. वह बताती हैं- ये अटैक इतना दर्दनाक होता है कि इसे सह पाना मुश्किल है. एक बार तो ये अटैक 40 घंटे तक चला, जिसमें लगातार उल्टियां और बेहोशी होती रही. मैंने दो बच्चों को जन्म दिया है. मैंने लेबर पेन भी सहा है, लेकिन अटैक के दौरान जो दर्द मुझे होता है, वह उससे कहीं ज्यादा है.
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