
रेडिएशन इतना ज्यादा कि घंटेभर में मौत तय, क्यों रूस का मयाक है दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका?
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चेर्नोबिल में परमाणु हादसे को लगभग चार दशक बीत चुके, लेकिन अब भी वहां कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है, जो वैज्ञानिकों को परेशान कर रहा है. इंसानों से खाली इस इलाके में अब वाइल्डलाइफ पर न्यूक्लियर रेडिएशन का असर दिखने लगा. हालांकि चेर्नोबिल अकेली जगह नहीं, जहां परमाणु हादसे का असर है. रूस की मयाक झील के आसपास रेडिएशन इतना खतरनाक है कि घंटेभर में शरीर गल जाए.
यूक्रेन का चेर्नोबिल अपने परमाणु रेडिएशन की वजह से अक्सर चर्चा में रहता है. अब भी वहां जंगली पशुओं और वनस्पति पर इसका असर बाकी है. दूसरी तरफ रूस का मयाक इलाका है. किसी समय मॉस्को ने इसे डंपिंग यार्ड बना रखा था. खासकर यहां की एक झील में रेडियोएक्टिव वेस्ट डाला जाता था. जल्द ही जहर फैलने लगा. झील सूखने लगी और रेडियोएक्टिव वेस्ट उड़कर आसपास के इलाकों तक फैलने लगा.
ये इतना घातक था कि आसपास के दर्जनों गांव खाली करवा दिए. लेकिन आज भी यहां प्रदूषण चेर्नोबिल से कई गुना ज्यादा है.
इस तरह हुई थी शुरुआत
पचास के दशक में सोवियत संघ (अब रूस) परमाणु ताकत के मामले में अमेरिका से पीछे था. शीत युद्ध चल रहा था. इस बीच बराबरी पर आने के लिए उसने काफी जोड़-तोड़ बिठाया. एक खुफिया मयाक प्लांट बनाया गया. उरल पहाड़ों के बीच चेलेबिन्स्क शहर के पास इस प्लांट में जो भी परमाणु कचरा आता था, उसे वहीं स्थित मयाक झील में डाल दिया जाता. ये वो वक्त था, जब रेडियोएक्टिव वेस्ट से निपटने का कोई पक्का तरीका नहीं था और न ही दुनिया इसपर कड़ी नजर रख पाती थी.
शुरू में यह एक सामान्य झील थी, लेकिन पचास के दशक से डंपिंग यार्ड बनते-बनते झील दुनिया की सबसे जहरीली जगह बन गई. साल 1957 में वहां एक बड़ा न्यूक्लियर हादसा हुआ. प्लांट में मौजूद एक रेडियोएक्टिव स्टोरेज टैंक फट गया. धमाका इतना बड़ा था कि बड़ा इलाका दूषित हो गया. लगभग 30 गांवों के हजारों-हजार लोग उस इलाके से निकाले गए.
खुफिया तरीके से हो रहा था काम

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