
रिमोट वोटिंग अभी सिर्फ विचार के स्तर पर, सरकार का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं
AajTak
सरकार ने संसद में साफ कर दिया कि फिलहाल रिमोट वोटिंग सिस्टम को अभी लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. अभी तक सिर्फ राजनीतिक दलों को एक अवधारणा नोट सर्कुलेट किया गया है.
देश के किसी भी कोने में रहते हुए अपने गृह प्रदेश या शहर कस्बे के चुनाव में वोट डालने के लिए रिमोट वोटिंग सिस्टम की चर्चा तो खूब हुई लेकिन सरकार ने संसद में साफ कर दिया कि अभी उसे लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सिर्फ राजनीतिक दलों को एक अवधारणा नोट सर्कुलेट किया गया है.
केंद्र सरकार के विधि और न्याय मंत्री किरेन रेजिजू ने राज्यसभा को बताया कि आरवीएम यानी रिमोट वोटिंग मशीन के जरिए देश में कहीं भी रह रहे प्रवासी मतदाता को उनके गृह राज्य के स्थानीय चुनाव में भागीदारी सुनिश्चित करने की सुविधा के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की सोच हमने देश की जनता के सामने रखी. इस बाबत एक नोट सभी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय स्तर के राजनीतिक दलों को भेजा था. उस पर विचार जानने के लिए निर्वाचन आयोग ने 16 जनवरी को राजनीतिक दलों के साथ इस पर चर्चा भी की थी. 28 फरवरी तक उनसे लिखित सुझाव, आपत्ति और विचार भी आमंत्रित किए गए थे.
रेजिजू ने लिखित उत्तर में बताया कि इस नोट में प्रवासी मतदाताओं की परिभाषा, क्षेत्रीय अवधारणा, दूरस्थ मतदान की विधि और प्रक्रिया, मतगणना का तौर तरीका, चुनावी आदर्श आचार संहिता के लागू होने की परिस्थिति, स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भय मतदान के लिए सुनियोजित और समुचित माहौल मुहैया कराने के साथ- साथ इस पर आने वाले खर्च और व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी तय होने के मुद्दों पर भी राय, सुझाव और आपत्तियां भिजवाने का आग्रह निर्वाचन आयोग ने किया था. उस पर आयोग में आगे काम चल रहा है.
गौरतलब है कि पूरे देश में लगभग 30 से 40 करोड़ मतदाता जो अपने मूल क्षेत्र में जाकर वोट नहीं दे पाते. ऐसे में अगर रिमोट वोटिंग सिस्टम होता है तो उनको अपने प्रवास वाले शहर, गांव या कस्बे में रहते हुए अपने मूल चुनाव क्षेत्र में अपना वोट देने की सहूलियत मिल जाएगी.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








