
राहुल गांधी कैंप के अजय माकन को मिली कांग्रेस कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी, क्या हैं इसके सियासी मायने
AajTak
राजनीतिक गलियारों में इस तरह की चर्चाओं ने भी अब जोर पकड़ लिया है कि राजनीतिक तौर पर राहुल गांधी की आंख और कान माने जाने वाले माकन जोरदार वापसी ऐसा माना जा रहा है कि कोषाध्यक्ष के रूप में अजय माकन की एंट्री पार्टी में टीम राहुल गांधी को मजबूत करने की तैयारी है, जिसमें के सी वेणुगोपाल, जितेंद्र सिंह और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे पदाधिकारी शामिल हैं.
कांग्रेस नेता अजय माकन AICC के नए कोषाध्यक्ष होंगे. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस नियुक्ति पर मुहर लगा दी है. अजय माकन को यह जिम्मेदारी पवन कुमार बंसल की जगह सौंपी गई है. राहुल गांधी की मुहर और कई दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए अजय माकन कांग्रेस के कोषाध्यक्ष बने हैं. देश की सबसे पुरानी पार्टी में कोषाध्यक्ष का पद बेहद प्रतिष्ठित पद माना जाता है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि माकन की मदद के लिए जल्द ही सह-कोषाध्यक्ष की नियुक्ति की जा सकती है.
अजय माकन पंडित उमा शंकर दीक्षित, प्रणब मुखर्जी, सीताराम केसरी, अहमद पटेल और मोतीलाल वोरा जैसे प्रतिष्ठित कांग्रेस नेताओं की उस लीग में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने कभी कांग्रेस के कोषाध्यक्ष के रूप में काम किया था. ऐसा माना जाता है कि कोषाध्यक्ष को कांग्रेस अध्यक्ष के बगल में और पार्टी संगठन के प्रभारी एआईसीसी महासचिव के बराबर बैठाया जाता है. ऐसे समय में जब अहमद पटेल और मोतीलाल वोरा एआईसीसी कोषाध्यक्ष थे, तब संगठन के प्रभारी यानी AICC महासचिव का पद कोषाध्यक्ष के पास होता था.
राजनीतिक गलियारों में इस तरह की चर्चाओं ने भी अब जोर पकड़ लिया है कि राजनीतिक तौर पर राहुल गांधी की आंख और कान माने जाने वाले माकन जोरदार वापसी करेंगे. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पद पर बने रहने के उनके विरोध और उसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के प्रति शत्रुता ने उन्हें संकट में डाल दिया था. एक समय पर माकन प्रशांत किशोर को चुनाव रणनीतिकार और चुनाव प्रबंधन प्रमुख के रूप में पार्टी में शामिल करने के भी प्रबल समर्थक थे.
नवंबर 2022 में कांग्रेस नेता माकन ने कांग्रेस नेता अजय माकन ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर राजस्थान के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी जारी रखने में असमर्थता और अनिच्छा जताई थी. लिहाजा उन्होंने राजस्थान प्रभार का पद छोड़ दिया था. अजय माकन ने इस कदम की वजह 25 सितंबर को हुए राजनीतिक घटनाक्रम को बताया था. दरअसल, माकन 25 सितंबर 2022 को खड़गे के साथ जयपुर गए थे (तब खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं थे). उस दौरान गहलोत खेमे ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने से इनकार कर दिया था. माकन तब राजस्थान कांग्रेस प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे थे.
खड़गे को सौंपा था राजस्थान प्रभारी पद से इस्तीफा
लिहाजा माकन आग्रह करते रहे और लिखते रहे कि पर्यवेक्षकों का एक और समूह जयपुर भेजा जाना चाहिए. इस घटनाक्रम के बाद माकन ने अपना विरोध स्पष्ट करते हुए इस्तीफा दे दिया था. अपने इस्तीफे में माकन ने खड़गे को 25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम के बारे में याद दिलाने के लिए एक भी शब्द नहीं कहा, लेकिन 137 साल पुरानी पार्टी के इतिहास में पहली बार एआईसीसी पर्यवेक्षक सीएलपी बैठक आयोजित करने में विफल रहे थे.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









