
राष्ट्रपति से मांग, अग्निपथ विरोध से जुड़े केस हों वापस, युवाओं कों भर्ती में शामिल होने का मिले मौका
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अग्निपथ स्कीम के खिलाफ विरोध करने वाले युवाओं पर दर्ज हुए मामले वापस लेने की अपील हुई है. टीआरएस नेता की तरफ से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग हुई है.
अग्निपथ स्कीम के खिलाफ देश के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले थे. बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में तो आगजनी तक कर दी गई थी. आर्मी ने साफ कहा था कि जिन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज होंगे, उनका सेना में शामिल होने का सपना पूरा नहीं हो सकता है. अब इस विवाद के बीच TRS नेता बी विनोद कुमार ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से खास अपील की है.
उनकी तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति ही अब इन युवाओं के खिलाफ दर्ज हुए मामले वापस ले सकते हैं. वे कहते हैं कि राष्ट्रपति के पास तो किसी की फांसी की सजा को भी उम्रकैद में बदलने की ताकत रहती है. यहां भी राष्ट्रपति को उन युवाओं को आगे की परीक्षाओं में बैठने की इजाजत दे देनी चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि ज्यादातर युवा अभी 20 साल के करीब हैं, बेरोजगार भी हैं. जो सेना में जाना चाहते हैं, वे लंबे समय से फाइनल टेस्ट का इंतजार कर रहे थे. ऐसे में जब अग्निपथ योजना आई, उन्होंने गुस्से में आकर ऐसा प्रदर्शन किया. उन पर दर्ज हुए मामले वापस होने चाहिए.
अब राष्ट्रपति इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं या नहीं, ये आने वाले वक्त में साफ हो जाएगा. अभी के लिए सरकार ने साफ कर दिया है कि वे अग्निपथ योजना को वापस नहीं लेने वाले हैं. तीनों सेना प्रमुख ने भी प्रेस कॉन्फ्रेस कर स्पष्ट कर दिया है कि वे इस योजना का समर्थन करते हैं और आने वाले वक्त में इसका फायदा ही मिलने वाला है. सरकार का तर्क है कि भविष्य में इस योजना की वजह से सेना में जवानों की औसतन उम्र को कम किया जा सकेगा, इसके अलावा पेंशन का जो बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, वो भी कम कर दिया जाएगा. ऐसी भी जानकारी मिली है कि आने वाले 10 साल में आर्मी में तीन लाख तक जवानों की संख्या कम की जा सकती है.
वहीं क्योंकि पेंशन का बोझ कम हो जाएगा, ऐसे में आधुनिक हथियारों की खरीदारी में भी तेजी लाई जाएगी. अभी तक रक्षा का जो बजट जारी होता है, उसमें एक बड़ी राशि सिर्फ पेंशन में निकल जाती है. लेकिन अग्निपथ योजना के बाद ऐसा कहा जा रहा है, इस पैटर्न में फर्क आएगा.

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