
रामचरित मानस, मनुस्मृति पर विवादित बयान देने वाले RJD नेता चंद्रशेखर का नीतीश ने बदला विभाग, बिहार में होगा बड़ा खेल!
AajTak
INDIA गठबंधन में 2024 लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. नीतीश कुमार की पार्टी लगातार आरजेडी पर दबाव बना रही है कि जनवरी तक सीटों का बंटवारा हो जाना चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ लालू प्रसाद ने साफ कह दिया है कि सीट बंटवारे को लेकर कोई जल्दबाजी में वह नहीं है.
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बीच बढ़ रही दूरी के बीच नीतीश ने RJD कोटे के तीन मंत्रियों के विभाग में फेरबदल कर दिया, जिससे इस बात को बल मिल रहा है कि जनता दल यूनाइटेड (JDU)और राजद के बीच तकरार बढ़ती जा रही है. दिलचस्प बात ये भी है कि नीतीश कुमार ने 22 जनवरी को अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर उद्घाटन से ठीक पहले अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया है. सबसे बड़ा फेरबदल शिक्षा विभाग को लेकर है. भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री आलोक मेहता को अब शिक्षा विभाग का मंत्री बनाया गया है. वहीं, ललित यादव को भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री बनाया गया है. ललित यादव अब तक लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मंत्री थे.
नीतीश कुमार ने विवादित शिक्षामंत्री चंद्रशेखर, जो लगातार रामचरित मानस, हिंदुत्व और धार्मिक मामलों को लेकर विवादित बयान दे रहे थे, उनका विभाग बदलकर गन्ना उद्योग विभाग का मंत्री बना दिया है. ये इस बात का संकेत है कि नीतीश कुमार ने उनके कद को कम कर दिया है और राजद को मैसेज दे दिया है कि बिहार में कोई बड़ा खेल जल्द खेला जा सकता है.
ये भी पढ़ें- नीतीश कैबिनेट में बड़ा फेरबदल, शिक्षा विभाग से चंद्रशेखर की छुट्टी, तीन मंत्रियों के विभाग बदले
सूत्रों के मुताबिक चंद्रशेखर जो यादव समाज से आते हैं, उनके लालू प्रसाद से काफी अच्छे रिश्ते हैं और नीतीश कुमार ने चंद्रशेखर से शिक्षा विभाग जैसा महत्वपूर्ण विभाग लेकर उन्हें गन्ना उद्योग विभाग दे दिया है, इससे साफ है कि बिहार में आने वाले दिनों में कोई बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है.
चंद्रशेखर ने पिछले साल जनवरी में पहले रामचरित मानस को लेकर विवादित बयान दिया था और उसकी कुछ चौपाइयों का हवाला देते हुए इसे नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया था. साथ ही मनुस्मृति को लेकर भी विवादित टिप्पणी की थी. इसके बाद सितंबर में चंद्रशेखर ने एक बार फिर से रामचरित मानस को लेकर विवादित टिप्पणी की और उसकी तुलना पोटेशियम साइनाइड से करती थी.
दिलचस्प है कि रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी करने के बाद नीतीश कुमार ने खुद ऐसे बयानों से चंद्रशेखर को परहेज करने की हिदायत दी थी, लेकिन इसके बावजूद चंद्रशेखर धार्मिक मुद्दों और हिंदुत्व को लेकर विवादित टिप्पणी करते आ रहे थे. राजद कोटा के तीन मंत्रियों का विभाग बदलकर नीतीश कुमार ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि महागठबंधन सरकार में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.







