
राज ठाकरे के बेटे की हार क्या कहती है, MNS में दमखम बचा है या खत्म हो गया? | Opinion
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राज ठाकरे के लिए तो सबसे खराब बात ये रही कि उनके बेटे अमित ठाकरे अपना पहला ही चुनाव हार गये, और उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की वजह से उद्धव ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने अपनी सीट बचा ली.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे अगर किसी के लिए सबसे ज्यादा बुरे रहे तो वो हैं राज ठाकरे. क्योंकि पहली बार चुनाव मैदान में उतरे राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे चुनाव हार गये. वो माहिम विधानसभा सीट से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे.
और इससे बुरा क्या होगा कि अमित ठाकरे किसी और से नहीं बल्कि शिवसेना-यूबीटी के उम्मीदवार से चुनाव हार गये. हार भी इतनी खराब रही कि अमित ठाकरे तीसरे नंबर पर पहुंच गये थे - और दूसरे नंबर पर वहां शिवसेना-शिंदे का उम्मीदवार रहा.
राज ठाकरे से लिए इससे भी दुखदाई खबर क्या होगी कि वर्ली में आदित्य ठाकरे ने अपनी सीट बचा ली, और वो भी शिवसेना उम्मीदवार मिलिंद देवड़ा को हराकर. ध्यान देने वाली बात ये है कि वर्ली में हार-जीत का जो अंतर था, उससे ज्यादा वोट एमएनएस उम्मीदवार को मिले थे.
ये तो महज दो सीटों का उदाहरण है, पूरे महाराष्ट्र में ऐसी 10 सीटें देखी गईं, जिन पर हार जीत के फैसले में एमएनएस उम्मीदवार की सबसे बड़ी भूमिका लगती है - ये ठीक है कि राज ठाकरे के लिए बेटे की हार बड़ा सदमा है, लेकिन ऐन उसी वक्त ये क्या कम है कि राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना चुनाव मैदान में बनी हुई है.
1. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मुंबई की 36 में से 25 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. राज ठाकरे ने 7 सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया था, जहां से बीजेपी के बड़े नेता चुनाव लड़ रहे थे. हालांकि, बीजेपी के खिलाफ 10 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 12 उम्मीदवारों के खिलाफ एमएनएस के प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे.
2. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एमएनएस के 125 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे, और एक-दो को छोड़कर सभी की जमानत जब्त हो गई है. एमएनएस की स्थापना के बाद ये पहला मौका है जब राज ठाकरे का कोई भी विधायक मंत्रालय बिल्डिंग में नहीं पहुंच सका है.

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