
राजस्थान के 'राइट टू हेल्थ' बिल में ऐसा क्या है जिसे लेकर हफ्तेभर से हड़ताल पर हैं डॉक्टर?
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राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने 21 मार्च को विधानसभा में राइट टू हेल्थ बिल पास किया. लेकिन इस बिल का विरोध शुरू हो गया है. करीब हफ्तेभर से राज्य में डॉक्टर हड़ताल पर हैं. डॉक्टरों ने इस बिल को असंवैधानिक बताया है और इसकी वापसी की मांग कर रहे हैं. ऐसे में जानना जरूरी है कि इस बिल में ऐसा क्या है, जो इसका इतना विरोध हो रहा है?
राजस्थान विधानसभा में स्वास्थ्य को लेकर एक अहम बिल पास हुआ है. ये बिल राज्य के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य का अधिकार देता है. पर इस बिल का विरोध भी शुरू हो गया है.
राज्य के डॉक्टरों ने बिल के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है. हफ्तेभर से डॉक्टर सड़कों पर हैं. इस बिल के खिलाफ राजस्थान के डॉक्टरों को अब बाकी शहरों के डॉक्टरों का साथ भी मिल रहा है. मुंबई के निजी डॉक्टरों का कहना है कि ये बिल 'गलत आइडिया' है और ये डॉक्टरों को प्रैक्टिस करने से 'डिमोटिवेट' करेगा.
इस बिल के खिलाफ मुंबई के डॉक्टर भी सोमवार को कैंडल मार्च निकाल रहे हैं. बॉम्बे हॉस्पिटल के डॉ. गौतम भंसाली ने कहा, 'हम सभी मरीजों को फ्री में इलाज कैसे दे सकते हैं. इन्फ्रास्ट्रक्चर में पैसा खर्च होता है. जांच में पैसा खर्च होता है. डॉक्टरों और स्टाफ की सैलरी में पैसा खर्च होता है. और अगर हम फ्री इलाज देंगे तो सैलरी के लिए पैसा कहां से लाएंगे.'
इसी बीच, राजस्थान सरकार के इस बिल का विरोध अब तक तो निजी डॉक्टर कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें सरकारी डॉक्टरों का भी साथ मिल गया है. ये डॉक्टर 'राइट टू हेल्थ बिल' को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं.
पर ऐसा है क्या इस बिल में?
- राजस्थान विधानसभा में ये बिल 21 मार्च को पास हो चुका है. गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही ये कानून बन जाएगा.

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