
यूरोप के लिए मैक्रों की X पोस्ट का इशारा चर्चा में, राफेल को बताया अमेरिकी जेट्स का विकल्प!
AajTak
मैक्रों लंबे समय से यूरोप की रणनीतिक आत्मनिर्भरता की बात करते आए हैं. इस साल मार्च में भी उन्होंने कहा था कि हमें उन देशों के लिए यूरोपीय विकल्प देना चाहिए जो अमेरिकी हथियारों पर निर्भर हैं. इन हथियारों का उत्पादन बढ़ाने से लागत कम होगी और यूरोप में एक आत्मनिर्भर रक्षा नेटवर्क बनेगा.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक मजेदार पोस्ट में यूरोपीय देशों से कहा कि वे अमेरिकी फाइटर जेट्स पर निर्भरता कम करें और फ्रांस के राफेल जेट को चुनें. इससे यूरोप की रक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
मैक्रों ने X पर एक पोस्ट शेयर की जिसमें राफेल जेट की तस्वीर थी और मोबाइल स्क्रीन पर लिखा था, 'Secure our Europe. पोस्ट का कैप्शन था, 'European friends, you have a call'. मैक्रों ने पोस्ट में ज्यादा कुछ नहीं बताया लेकिन इसे यूरोपीय देशों, खासकर नाटो सहयोगियों के लिए एक संदेश माना जा रहा है. वो चाहते हैं कि यूरोप अपनी रक्षा के लिए यूरोपीय हथियार खरीदे और अमेरिकी तकनीक पर कम निर्भर रहे. ये बात ऐसे समय में आई है जब डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी विदेश नीति को लेकर अनिश्चितता है. राफेल बनाम अमेरिकी F-35 जेट
पिछले कुछ सालों में पोलैंड और फिनलैंड जैसे देशों ने अमेरिका के F-35 स्टील्थ फाइटर जेट चुने हैं जो लॉकहीड मार्टिन बनाती है. साल 2020 में पोलैंड ने 32 F-35 जेट्स के लिए 4.6 बिलियन डॉलर का सौदा किया. फिनलैंड ने 2021 में 64 F-35 ऑर्डर किए.
वहीं राफेल एक 4.5 जनरेशन का फाइटर जेट है जिसे फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने बनाया है. यह हवा से हवा और जमीन पर हमले करने में सक्षम है. भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए राफेल का इस्तेमाल किया था.
मैक्रों की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर पहले से तेज उन अटकलों को हवा देती है जिसमें कहा गया कि F-35 लड़ाकू विमानों में 'किल स्विच' नाम की कोई तकनीक हो सकती है यानी ऐसा सिस्टम जिससे अमेरिका इन जेट्स को रिमोट से बंद या उनकी क्षमता को सीमित कर सके, चाहे वे किसी सहयोगी देश को ही क्यों न बेचे गए हों. हालांकि, पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ने इन अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
मैक्रों और ट्रंप में तनातनी

ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की मौत से ईरान बुरी तरह आहत है. इस हमले में लारिजानी का बेटा भी मारा गया है. ईरान ने अब अमेरिकी और इजरायली हमले के जवाब में कार्रवाई तेज करते हुए कई क्लस्टर बम गिराए है और तेल अवीव में भारी नुकसान पहुंचाया है और अनुमान लगाया जा रहा है कि जंग यहां से अब और भीषण रूप ले लेगी.

ईरान और अमेरिका-इजरायल की जंग का आज 19वां दिन है. लेकिन ये जंग अब थमने का नाम नहीं ले रही है. दोनों तरफ से ताबड़तोड़ हमले जारी है. इस बीच ईरान ने दुबई पर फिर हमला किया है. इस हमले का वीडियो भी सामने आया है. हमले के बाद दुबई के कई इलाकों में धमाकों की आवाज सुनाई दी. दुबई के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर तबाह किया.

ईरान और अमेरिका की जंग का आज 19वीं दिन है. इस बीच इजरायल के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ लीडर अली लारिजानी की मौत के बाद अब ईरान ने इजरायल और अमेरिकी बेसों पर हमले तेज कर दिए हैं. ईरान ने मिसाइल हमलों का वीडियो भी जारी किया है. IRGC ने कहा कि हमले में मल्टी-वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों समेत कई और घातक मिसाइलें शामिल हैं.

अमेरिका ने होर्मुज के समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है. अमेरिकी राष्पति ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि उनके साथी देश (नाटो) इस लड़ाई में साथ नहीं दे रहे हैं. इस हमले का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है.

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां आक्रामक रुख अपनाया है, वहीं कई सहयोगी देश सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाकर कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. ब्रिटेन के ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर ट्रंप भड़क गए हैं.








