
यूपी के ताकतवर नौकरशाह और CM योगी आदित्यनाथ के करीबी अवनीश अवस्थी कल हो जाएंगे रिटायर?
AajTak
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले नौकरशाह अवनीश अवस्थी कल रिटायर हो सकते हैं. कहा जा रहा है कि उन्हें कोई एक्सटेंशन नहीं दिया जा रहा, ऐसे में उन्हें कल रिटायर होना ही पड़ेगा. 2002 से ही अवनीश सीएम योगी के काफी करीबी रहे हैं, यूपी सरकार के कई अहम फैसलों में भी उनका योगदान रहा है.
87 बैच के आईएएस अधिकारी अवनीश अवस्थी 35 साल की सर्विस के बाद 31 अगस्त की शाम रिटायर हो सकते हैं. अगर ऐन वक्त पर उनके सेवा विस्तार पर कोई फैसला नहीं लिया गया तो उन्हें रिटायर होना ही पड़ेगा. यूपी के ब्यूरोक्रेसी में पिछले 1 महीने से अवनीश अवस्थी के सेवा विस्तार को लेकर लगातार अटकलें लग रही थीं. चर्चा इस बात की थी कि उनके सेवा विस्तार की चिट्ठी केंद्र के पास को भेजी गई है लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा.
माना यह जा रहा था कि चुकी अवनीश अवस्थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेहद ही करीबी हैं और योगी उन पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, ऐसे में अगर वे एक्सटेंशन चाहेंगे तो केंद्र सेवा विस्तार दे सकता है. लेकिन अवनीश अवस्थी के सेवा विस्तार की उम्मीदें अब बिल्कुल क्षीण हो गई हैं. यहां तक कि अवनीश अवस्थी को करीब से जानने वाले भी बता रहे हैं कि सेवा विस्तार नहीं मिलेगा और वह कल रिटायर हो जाएंगे.
कई नौकरशाह यह बताते हैं अगर अवनीश अवस्थी को सेवा विस्तार नहीं मिलता तो इसके पीछे वजह प्रशासनिक है न की सियासी. जानकारों के मुताबिक देश में कहीं भी ACS यानी कि एडिशनल चीफ सेक्रेटरी जो कि राज्यों में तैनात हैं, उन्हें सेवा विस्तार देने का कोई उदाहरण नहीं है. यानी ACS रहते सेवा विस्तार नहीं मिल सकता, सिर्फ डीजीपी और चीफ सेक्रेट्री को ही सेवा विस्तार मिल सकता है. अवनीश अवस्थी न तो चीफ सेक्रेटरी हैं और ना ही डीजीपी, ऐसे में उन्हें सेवा विस्तार मिलना लगभग नामुमकिन है. वैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी नौकरशाह होने की वजह से यह माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री की अगर इच्छा होगी तो उन्हें केंद्र सरकार एक्सटेंशन दे सकती है.
जब से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं तब से कोई एक अधिकारी जिसे सबसे करीब माना गया, उनका नाम अवनीश अवस्थी है, ये करीबी भी आज की नहीं बल्कि 2002-2003 की है जब अवनीश अवस्थी गोरखपुर के डीएम हुआ करते थे और योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के सांसद. वैसे अवनीश अवस्थी को जब गृह विभाग दिया गया तब उसके बाद कई ऐसे बड़े फैसले योगी आदित्यनाथ ने लिए जिसने योगी के मॉडल को आगे किया . चाहे CAA NRc हो, माफियाओं के खिलाफ योगी सरकार का बुलडोज़र हो, धर्मस्थलों से लाउड स्पीकर उतारना हो, एनकाउंटर जैसी पॉलिसी हो, सभी के पीछे अवनीश अवस्थी का भी अहम रोल माना जाता था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








