
'यूक्रेन के साथ जंग नहीं रोकी तो 10 दिन में मॉस्को पर लगेंगे नए प्रतिबंध', रूस को ट्रंप का अल्टीमेटम
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एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें अब तक रूस की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है. ट्रंप ने कहा कि पहले जो 50 दिन की डेडलाइन तय की गई थी, उसे अब घटाकर 10 से 12 दिन कर दिया गया है क्योंकि मॉस्को की ओर से कोई प्रगति नहीं दिख रही.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को वॉर्निंग देते हुए कहा कि अगर उसने यूक्रेन के साथ चल रही जंग खत्म करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका अगले 10 दिनों के भीतर उस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध और टैरिफ (आयात शुल्क) लागू करेगा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें अब तक रूस की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है. ट्रंप ने कहा कि पहले जो 50 दिन की डेडलाइन तय की गई थी, उसे अब घटाकर 10 से 12 दिन कर दिया गया है क्योंकि मॉस्को की ओर से कोई प्रगति नहीं दिख रही.
ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर हमें पहले से जवाब मालूम है, तो फिर इंतजार क्यों करें? रूस पर अब प्रतिबंध और संभवतः सेकेंडरी टैरिफ लगाए जाएंगे. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की कोई योजना नहीं है. इसके बजाय, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर रूस उनकी शर्तों का पालन नहीं करता है, तो प्रतिबंध और टैरिफ उसके ख़िलाफ़ दंडात्मक उपाय साबित होंगे.
वैश्विक तेल बाजार पर क्या असर होगा? वैश्विक तेल बाजार पर असर की चिंता को भी ट्रंप ने खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका की घरेलू तेल उत्पादन क्षमता किसी भी तरह की आर्थिक चुनौती का सामना करने में सक्षम है.
जेलेंस्की ने किया फैसले का स्वागत इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ट्रंप की इस सख्त चेतावनी का स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लिए गए स्पष्ट और निर्णायक रुख के लिए धन्यवाद. यह वह समय है जब दृढ़ता से चीजें बदल सकती हैं और शांति की ओर बढ़ा जा सकता है. जेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप का ध्यान युद्ध को रोकने और जानें बचाने पर है, जो इस वक्त बेहद जरूरी है.रूस ने क्या कहा?
उधर, रूस ने जेलेंस्की और पुतिन के बीच अगस्त से पहले बैठक के प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया है. रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अगर पश्चिम वाकई यूक्रेन में शांति चाहता है, तो उसे कीव को हथियार भेजना बंद करना चाहिए. अब सभी की निगाहें आने वाले 10 दिनों पर टिकी हैं कि क्या रूस कदम उठाएगा या अमेरिका की ओर से नए प्रतिबंधों की बौछार होगी.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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