
युद्ध, टैरिफ और वैश्विक खींचतान के बीच इस हफ्ते ट्रंप और शी जिनपिंग की होगी बातचीत
AajTak
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को सीबीएस के प्रोग्राम फेस द नेशन को बताया कि व्यापारिक विवादों को निपटाने के लिए ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत जल्द होगी. इनमें महत्वपूर्ण खनिजों और चुनिंदा खनिजों को निर्यात करने की चीन की लिमिट पर असहमतियां भी शामिल हैं.
वैश्विक उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस हफ्ते बातचीत होने जा रही है. यह बातचीत फोन कॉल के जरिए होगी. व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है.
ट्रंप और जिनपिंग के बीच यह बातचीत ऐसे समय पर होगी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ कम करने की डील तोड़ने का चीन पर आरोप लगाया है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप और जिनपिंग की जल्द ही बातचीत होगी. वहीं, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को सीबीएस के प्रोग्राम फेस द नेशन को बताया कि व्यापारिक विवादों को निपटाने के लिए ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत जल्द होगी. इनमें महत्वपूर्ण खनिजों और चुनिंदा खनिजों को निर्यात करने की चीन की लिमिट पर असहमतियां भी शामिल हैं.
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि ट्रंप चीन के राष्ट्रपति से बातचीत करेंगे. वहीं, अमेरिका और चीन के बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच चीन ने अमेरिका पर उनके व्यापार समझौते के उल्लंघन का हवाला दिया है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने पिछले महीने जेनेवा में वार्ताओं के दौरान हुए समझौते को कमजोर किया है, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई थी.
बता दें कि अमेरिका ने चीन से आयातित वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क को 145 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दिया था. वहीं, चीन ने अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क को 125 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया था.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा. कई टॉप कमांडर्स के मारे जाने के बाद भी ईरान, अमेरिका और इजरायल पर जबरदस्त पलटवार कर रहा है. ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ना तो ईरान के तेवर कमजोर पड़ रहे और ना ही NATO और दुनिया के तमाम देश ट्रंप का साथ दे रहे. सवाल है क्या ईरान को हराना ट्रंप के लिए 'नाक की लड़ाई' बन गई है? देखें हल्ला बोल.

ईरान ने भी अपनी मिसाइल ताकत को दुनिया के सामने पेश किया है और ईरान ने हिंद महासागर में मौजूद ब्रिटेन के सैन्य बेस पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर दो लॉन्ग रेंज मिसाइलों से हमला किया है. हम आपको बता दें कि ईरान से दिएगो गार्सिया की दूरी करीब 4 हजार किलोमीटर है. ईरान ने दिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जिसमे एक को बीच में ही नष्ट करने का दावा किया जा रहा है.

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिन की छूट दी, लेकिन ईरान ने एक्स्ट्रा तेल होने से इनकार कर दिया. दोनों के दावों से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. दुनियाभर के मुल्क ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अमेरिकी की ओर से छूट मिलने के बाद ईरान का तेल उन्हें मिलेगा. लेकिन, ईरान के बयान से सभी को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.









