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युद्ध इतिहास को सार्वजनिक करने की पॉलिसी मंजूर, क्या बदलेगा?

युद्ध इतिहास को सार्वजनिक करने की पॉलिसी मंजूर, क्या बदलेगा?

The Quint
Saturday, June 12, 2021 02:51:07 PM UTC

War records:युद्ध इतिहास के समय पर प्रकाशन से लोगों को घटना का सही विवरण उपलब्ध होगा: रक्षा मंत्रालय | Timely publication of war histories would give people accurate account of the events: Defence Ministry

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युद्ध और सैन्य ऑपरेशन से जुड़े इतिहास को आर्काइव करने, उन्हें गोपनीयता सूची से हटाने और उनके संग्रह से जुड़ी नीति को शनिवार को मंजूरी दे दी.इस बारे में रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बताया है, ‘‘युद्ध इतिहास के समय पर प्रकाशन से लोगों को घटना का सही विवरण उपलब्ध होगा, अकैडमिक रिसर्च के लिए प्रमाणिक सामग्री उपलब्ध होगी और इससे बेबुनियाद अफवाहों को दूर करने में मदद मिलेगी.’’नई नीति के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सभी प्रतिष्ठान, जैसे कि सेना की तीनों शाखाएं (थल-जल-वायु), इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, असम राइफल्स और भारतीय तटरक्षक वॉर डायरीज (युद्ध के दौरान घटित घटनाओं का विस्तृत ब्योरा), लेटर्स ऑफ प्रोसिडिंग्स (विभिन्न प्रतिष्ठानों के बीच अभियान/युद्ध संबंधी आपसी संवाद) और ऑपरेशनल रिकॉर्ड बुक (अभियान की पूरी जानकारी) सहित सभी सूचनाएं रक्षा मंत्रालय के इतिहास विभाग को मुहैया कराएंगे जो इन्हें सुरक्षित रखेगा, उनका संग्रह करेगा और इतिहास लिखेगा.ADVERTISEMENTरक्षा मंत्रालय के बयान में बताया गया है, ‘‘पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट 1993 और पब्लिक रिकॉर्ड रूल्स 1997 के अनुसार रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रतिष्ठान की है.’’नीति के अनुसार, सामान्य तौर पर रिकॉर्ड को 25 साल के बाद सार्वजनिक किया जाना चाहिए. बयान के मुताबिक, ‘‘युद्ध/ऑपरेशन इतिहास के संग्रह के बाद 25 साल या उससे पुराने रिकॉर्ड की संग्रह विशेषज्ञों द्वारा जांच कराए जाने के बाद उसे राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंप दिया जाना चाहिए.’’बयान में कहा गया है कि युद्ध और ऑपरेशन के इतिहास के प्रकाशन के लिए विभिन्न विभागों से उसके संग्रह और मंजूरी के लिए इतिहास विभाग जिम्मेदार होगा.रक्षा मंत्रालय ने बताया है, ‘‘नीति रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव के नेतृत्व में समिति के गठन की बात करती है जिसमें थलसेना-नौसेना-वायु सेना के प्रतिनिधियों, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अन्य प्रतिष्ठानों और (जरूरत के हिसाब से) प्रतिष्ठित इतिहासकारों को समिति में शामिल करने की बात करती है. समिति युद्ध और अभियान इतिहास का संग्रह करेगी.’’(PTI के इनपुट्स के साथ)(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)ADVERTISEMENT...
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