'चिंकी', 'चाइनीज' और नस्लवाद पर नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दर्द की कहानी
The Quint
नीडो तानिया से मालवीय नगर तक, 12 साल में क्या बदला? बेजबरुआ कमेटी की रिपोर्ट धूल फांक रही है और नॉर्थ-ईस्ट के छात्र आज भी 'चिंकी-चाइनीज' जैसे नस्ली हमलों का दंश झेल रहे हैं. आखिर अपनों से ये परायापन कब खत्म होगा? देखिए ग्राउंड रिपोर्ट.
"यहां तक की छोटे-छोटे बच्चे कहते हैं- 'चिंकी', 'चाइनीज' यहां से जाओ. यह देखकर दुख होता है. इतने छोटे-छोटे बच्चों की कैसे परवरिश हो रही है. उन्हें दुनिया के बारे में कुछ भी पता नहीं है. लेकिन हमारे चेहरे की बनावट की देखकर वे चाइनीज कहते हैं. जाहिर है, बच्चे ऐसी बातें अपने आप नहीं सीखते, बल्कि यह उनके आसपास के माहौल और समाज से ही आती हैं," ये कहना है अरुणाचल प्रदेश की यानी हेमी का, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा है.
दरअसल, बीते दिनों दिल्ली के मालवीय नगर में रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों ने अपने पड़ोसियों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी करने (Racism) और बदतमीजी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई थी. युवतियों ने इस घटना का वीडियो बनाया जो कि वायरल हो गया. इस वीडियो में आरोपी "मोमो", "मसाज पार्लर वाली" जैसी आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियां करते नजर आ रहे हैं.
इस घटना के बाद एक बार फिर नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव का मुद्दा चर्चा में आ गया है.


