
म्यांमार में तख्तापलट की निंदा करने से क्यों झिझक रहा है भारत?
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भारत म्यांमार से आने वाले शरणार्थियों को लेकर भी चिंतित है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 16,000 रोहिंग्या पहले से ही भारत में हैं. लेकिन भारत सरकार का दावा है कि देश में इनकी तादाद 40 हजार से ज्यादा है. भारत-म्यांमार के रिश्तों में कई परतें हैं, लिहाजा तख्तापलट पर सीधा रुख अख्तियार करना मुश्किल काम है.
भारत उन आठ देशों में शामिल है जिन्होंने 27 मार्च को नेपिडाव में म्यांमार सशस्त्र सेना दिवस सैन्य परेड में शिरकत की. भारत के अलावा चीन, रूस, पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम, लाओस और थाइलैंड इस परेड में शामिल होने वाले देशों में शामिल थे. भारत म्यांमार सेना के परेड में उस वक्त शामिल हुआ, जब वहां लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को बेदखल कर सेना सत्ता पर काबिज हो गई. म्यांमार में नवंबर 2020 में हुए चुनाव नतीजों को खारिज करते हुए सेना ने तख्तापलट को अंजाम दिया. आंग सान सू की और म्यांमार के राष्ट्रपति विन माइंट को हिरासत में ले लिया गया. (फोटो-Getty Images) म्यांमार में सशस्त्र सेना दिवस सैन्य परेड यह आयोजन उस दिन हुआ था, जब सैनिकों की गोलियों से 100 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो गई. इसमें हिस्सा लेने वालों में भारत के प्रतिनिधि के अलावा पाकिस्तान, चीन और रूस के नुमाइंदे भी शामिल थे. पिछले महीने सशस्त्र सेना दिवस सैन्य परेड में बांग्लादेश के साथ भारत की मौजूदगी इस लिहाज से महत्वपूर्ण थी कि म्यांमार में सैन्य तख्तापलट को कुछ हद तक वैधता प्रदान करने वाला यह एकमात्र प्रमुख लोकतंत्रिक देश था. हालांकि चीन, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड में लोकतंत्र नहीं है. रूस और पाकिस्तान में सरकारें लोकतंत्र पर एक अलग तरह का मुलम्मा लगाकर शासन चलाती हैं. (फाइल फोटो)
पाकिस्तान ने देर रात अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक की. पाकिस्तान ने काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया. इसमें 400 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा है और 250 से ज्यादा लोगों घायल हैं. तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए. तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया है. वहीं पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया.

ईरान UAE के शहरों पर भीषण हमले कर रहा है. दुबई मॉल के आसपास स्थित पुलों पर अब बिल्कुल सन्नाटा पसरा हुआ है. रात के 11 बजे होने के बावजूद वहां लोग नहीं दिख रहे हैं जो आमतौर पर बहुत भीड़ होती थी. यहां के प्रसिद्ध रेस्टोरेंट पहले फुटबॉल मैच देखने वालों से भरे रहते थे और जगह कम पड़ जाती थी. लेकिन अब वहां केवल कुछ ही लोग हैं और रेस्टोरेंट के अंदर भी भीड़ बिलकुल नहीं है. बुर्ज खलीफा के पास का इलाका भी पूरी तरह शांत है, जहां कभी शोर शराबा होता था, अब वहां एकदम सन्नाटा है. देखें वीडियो.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ उनका ऑपरेशन पूरी ताकत से जारी है. उन्होंने बताया कि अब तक 7,000 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है. ट्रंप ने कहा कि मिसाइल और ड्रोन फैक्ट्रीज सहित सभी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया है, और ईरान की नेवी और एयर फोर्स को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. देखें वीडियो.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में उथल-पुथल मची है. ट्रंप की मुश्किल ये है कि कुछ महीने बाद नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं. जिसे देखते हुए ट्रंप की पार्टी के ही लोग इकॉनमी पर उनसे ज्यादा ध्यान देने की मांग कर रहे हैं. तेल के दाम बढ़ने से अमेरिका में महंगाई भी धीरे धीरे बढ़ रही है. ऐसे में अगर ये युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे ट्रंप की सियासी मुसीबत बढ़नी तय हैं. देखें वीडियो.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.







