
'मुझे इस तरह मत टारगेट करो', जब ट्रोल्स से परेशान हो गई थीं राधिका मदान
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राधिका मदान की फिल्म सजनी शिंदे का वायरल वीडियो इस हफ्ते रिलीज होने वाली है. इस फिल्म में राधिका सजनी के किरदार में नजर आने वाली हैं. इस मुलाकात में उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ते टॉक्सिक माहौल पर बातचीत की है.
राधिका मदान इन दिनों अपनी फिल्म 'सजनी शिंदे का वायरल वीडियो' में सजनी का किरदार निभाती नजर आने वाली हैं. फिल्म एक ऐसी आम लड़की पर बेस्ड है, जिसके प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया पर लीक हो जाते हैं. इस वीडियो के बाद सजनी क्या कदम उठाती है, कहानी उसी पर आधारित है. राधिका इस मुलाकात में हमसे अपने किरदार, सोशल मीडिया का प्रेशर और करियर प्लान्स पर ढेर सारी बातचीत करती हैं.
इस वजह से फिल्म के लिए हामी भरने की वजह पर राधिका कहती हैं, इस फिल्म को मैं आज के दौर के लिए मैं जरूरी मानती हूं. हर कोई इससे कनेक्ट कर पाएगा. सोशल मीडिया पर हम कहीं ज्यादा निर्भर हो चुके हैं. हमें लगता है कि हमारी पर्सनैलिटी, हमारा विहेवियर या कह लें, वजूद जो है, वो सोशल मीडिया से ही मिल सकता है. हालांकि इसका किस कदर हमें खामियाजा भुगतना पड़ता है, फिल्म उसी के ईर्द-गिर्द है. कई ऐसे बड़े नाम रहे हैं, जिनके वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जाते हैं, उसके बाद उनकी जिंदगी नर्क हो जाती है. जरा सोचें, जो आम आदमी या लड़की है, उसके साथ इस तरह की कोई हरकत हो जाए, तो उसके लिए कितनी बड़ी हो जाती है. उसकी पूरी जिंदगी तबाह हो जाती है. मैं चाहती थी कि इस फिल्म के जरिए मैं वैसी लड़की की आवाज बनूं.
राधिका आगे कहती हैं, कई बार हम खुद को अच्छा फील करवाने के चक्कर में दूसरों को नीचा गिराते जाते हैं. सोशल मीडिया पर तमाम प्राइवेट वीडियोज वायरल कर अपनी राय लिखने में लग जाते हैं. हमें इसका अंदाजा भी नहीं होता है कि हम अंजाने में ये कर मानवता के साथ खेल रहे हैं.
ट्रोलिंग पर राधिका कहती हैं, 'हम एक्टर्स की शुरुआत ही ट्रोलिंग से होती है. सोशल मीडिया पर आप निगेटिव चीजों को कितना ही इग्नोर कर सकते हो. मुझे याद है, जब मैं करियर की शुरुआत कर रही थी, तो अपने बारे में निगेटिव कमेंट पढ़कर बहुत रोया करती थी. आप हेल्पलेस महसूस करते हैं. कई बार आप बोलना चाहते हो कि मेरी बातों को गलत समझा जा रहा है. ये मैं नहीं हूं... मैं ऐसी नहीं हूं... मुझे इस तरह मत टारगेट करो. आपकी इन ट्रोलिंग का असर परिवार, करीबी दोस्त, सब पर पड़ता है. कहीं न कहीं उन्हें भी महसूस होता है कि आप उनको भी टारगेट कर रहे हो. हालांकि इस दौरान मेरे साथ काम करने वाले सीनियर्स ने मुझे काफी मदद की है. उन्होंने मुझे सीखाया है कि निगेटिविटी को कैसे नजर अंदाज करना है. मेरे पैरेंट्स के सपोर्ट ने भी मुझे हैरान कर दिया था, वो मुझसे आकर कहते थे कि बेटा आपको मोटी चमड़ी का बनना पड़ेगा. उन्होंने मुझे समझाया कि हम हर किसी को एक्सप्लेन नहीं कर सकते हैं.'

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