
मिस्र में खुदाई में मिली सबसे पुरानी 'ममी' की खोज! हाल देखकर दंग रह गए वैज्ञानिक
AajTak
मिस्र की राजधानी काहिरा के पास 4300 साल पुरानी संरक्षित ममी की खोज की गई है. यह मिस्र में मिली अब तक कि सबसे पुरानी ममी हो सकती है. इस खोज के जरिए पुरातत्वविदों को प्राचीन मिस्र के इतिहास को और विस्तार से जानने में मदद मिलेगी.
मिस्र एक ऐसा देश है, जहां ना जाने कितना ऐसा इतिहास छुपा हुआ है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है. इसी वजह से मिस्र के अलग-अलग हिस्सों में पुरातत्वविदों की खोज जारी रहती है. हाल ही में पुरातत्वविदों की एक टीन ने राजधानी काहिरा के पास प्राचीन मकबरे की खोज की है, जिसके अंदर 4300 साल पुरानी संरक्षित ममी मिली है. यह मिस्र में आजतक खोजी गई सबसे पुरानी ममी हो सकती है. पुरातत्वविदों और इतिहासकारों को इस ममी के सहारे प्राचीन मिस्र के इतिहास को और विस्तार से जानने में मदद मिलेगी.
खोज कर रहे पुरातत्वविदों की टीम के लीडर जही हवास ने बताया कि जो ममी मिली है, यह हेकाशीप्स नाम के शख्स की है. इस ममी को एक पत्थर से बने ताबूत के अंदर दफनाया गया होगा, जिसके बाद चूने की एक परत उसे बंद कर दिया गया होगा. सक्कारा में जिस मकबरे के अंदर इस ममी की खोज की गई है, उसका संबंध पांचवें और छठे साम्राज्य से है.
खोज में पुरातत्वविदों की टीम का नेतृत्व कर रहे मिस्र के पूर्व मंत्री हवास ने आगे कहा कि यह ममी मिस्र में अब तक खोजी गईं ममी में सबसे पुरानी हो सकती है. साथ ही खास बात है कि ताबूत के अंदर यह ममी करीब-करीब पूरी मिली है, जबकि पुरानी खोजों में ऐसा कम ही देखा गया है.
साइट पर पुरातत्वविदों को कई और मकबरे भी मिले हैं. इनमें से एक मकबरा उनास साम्राज्य के Khnumdjedef की है, जो उस समय काफी जिम्मेदार लोगों में से एक था. मकबरों में कई तरह की मूर्तियां भी मिली हैं. इसके अलावा दीवारों पर भी अलग-अलग तरह की कलाकृतियां बनी हुई हैं.
हाल ही में हुई थी 2300 साल पुरानी ममी की खोज
मालूम हो कि हाल ही में मिस्र में एक 2300 साल पुरानी ममी की खोज की गई थी. यह ममी एक 15 से 16 साल की उम्र के लड़के की है. ममी जिस ताबूत में मिली है, उसमें कई ऐसे चीजें भी मिली जिन्हें देखकर पुरातत्वविद भी दंग रह गए.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








