
महाराष्ट्र राजनीतिक संकट पर सुनवाई के लिए CJI की अध्यक्षता में बेंच का गठन, 20 जुलाई को सुनवाई
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सुप्रीम कोर्ट शिंदे गुट के भरत गोगावले और अन्य विधायकों की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. शिंदे गुट के 14 विधायकों ने डिप्टी स्पीकर की ओर से मिले अयोग्यता के नोटिस को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
शिवसेना से विधायकों के अलग होने के मामले पर एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव गुट की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को सुनवाई करेगा. इस मामले की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में बेंच का गठन कर दिया गया है. इस बेंच में जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट शिंदे गुट के भरत गोगावले और अन्य विधायकों की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. शिंदे गुट के 14 विधायकों ने डिप्टी स्पीकर की ओर से मिले अयोग्यता के नोटिस को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इस याचिका में ये भी कहा गया है कि डिप्टी स्पीकर को विधायकों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से रोका जाए क्योंकि कई विधायकों ने डिप्टी स्पीकर को ही अयोग्य ठहराने की कार्यवाही शुरू करने की गुहार लगाई है.
27 जून को हुई थी सुनवाई
पिछली बार इस मामले की सुनवाई 27 जून को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अवकाश कालीन पीठ के सामने हुई थी. उस समय पीठ ने विधायकों को डिप्टी स्पीकर के नोटिस का जवाब देने के लिए मोहलत बढ़ाकर 12 जुलाई तक कर दी थी. हालांकि अब तक इस मामले में सुनवाई नहीं हुई है.
सुनील प्रभु ने भी दायर की है याचिका
शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की ओर से नियुक्त पार्टी के चीफ व्हिप सुनील प्रभु की ओर से भी एक अन्य याचिका दाखिल की गई है. इसमें राज्यपाल के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसके तहत विधायकों की अयोग्यता का निर्णय होने से पहले ही विधानसभा सत्र बुलाकर स्पीकर का चुनाव और बहुमत का शक्ति परीक्षण भी करा लिया गया. राज्यपाल ने शिंदे गुट के बागी और व्हिप का उल्लंघन करने वाले विधायकों की अयोग्यता तय होने से पहले ही उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली महाविकास आघाड़ी सरकार को बहुमत सिद्ध करने को कहा. ये संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है.

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