
मनोमहन सिंह... वो वित्त मंत्री जिनके आर्थिक सुधारों का लोहा पूरी दुनिया ने माना
AajTak
मनमोहन सिंह पहली बार 1991 में राज्य सभा के लिए चुने गए थे. उन्होंने उच्च सदन में पांच बार असम और 2019 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया. 1998 से 2004 तक, जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में थी, मनमोहन सिंह राज्य सभा में विपक्ष के नेता थे.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार 26 दिसंबर को निधन हो गया. इस बात की जानकारी कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने X पर पोस्ट करके दी. वह लंबे समय से बीमार थे. आज शाम तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के AIIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री थे. वह जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी के बाद चौथे सबसे लंबे समय तक पीएम पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री थे. मनमोहन सिंह भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री थे.
पंजाब से ब्रिटेन तक का सफर
मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के एक गांव में हुआ था. उन्होंने 1948 में पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी मैट्रिक पूरी की. पंजाब से वह ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी तक पहुंचे, जहां उन्होंने 1957 में अर्थशास्त्र में फर्स्ट क्लास ऑनर्स की डिग्री हासिल की.
इसके बाद उन्होंने 1962 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नफ़ील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी.फिल की उपाधि हासिल की. मनमोहन सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाया भी है.
कई सरकारी पदों पर किया काम 1971 में मनमोहन सिंह भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में शामिल हुए. इसके तुरंत बाद 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में उनकी नियुक्ति हुई. वह जिन कई सरकारी पदों पर रहे उनमें वित्त मंत्रालय में सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी शामिल है. मनमोहन सिंह 1991 से 1996 के बीच भारत के वित्तमंत्री भी रहे. आर्थिक सुधारों की एक व्यापक नीति शुरू करने में उनकी भूमिका को दुनिया भर में सराहा जाता है.
1991 में पहली बार पहुंचे राज्य सभा

वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग के बाद पैदा हुए हालातों पर प्रधानमंत्री लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं. इस बीच उन्होंने कहा कि अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है. इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है. इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है.












