
भारत से बढ़े टकराव के बीच कनाडाई मीडिया ने ही खोल दी अपने PM जस्टिन ट्रूडो की पोल!
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कनाडा और भारत के बीच राजनयिक तनाव चरम पर है. कनाडा का आरोप है कि भारत एजेंट्स उसकी धरती पर उसके नागरिकों को कथित तौर पर निशाना बना रहे हैं. भारत ने इन आरोपों से इनकार किया है और अपने 6 राजनयिकों को कनाडा से वापस बुला लिया है. साथ ही भारत में मौजूद 6 कनाडाई राजनयिकों को वापस देश जाने को कह दिया है.
भारत और कनाडा के बीच बीते एक साल से चला आ रहा तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब सोमवार को कनाडा ने देश में हिंसा और हत्याओं के पीछे भारतीय एजेंटों का हाथ होने का आरोप लगाया. कनाडा के रॉयल कनैडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के कमिश्नर माइकल ड्यूहेम के भारत पर लगाए इन आरोपों के बाद भारत ने कनाडा से अपने उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा समेत बाकी डिप्लोमैट्स को वापस बुला लिया और कनाडा के छह डिप्लोमैट्स को देश से निष्कासित कर दिया है.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि भारत के छह एजेंटों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के सबूत मिले हैं और भारत सरकार सहयोग से इनकार कर रही है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी.
भारत-कनाडा के बीच मची इस तनातनी को लेकर कनाडा की मीडिया में काफी चर्चा है. वहां के अखबार, न्यूज वेबसाइट्स दोनों देशों के राजनयिक तनाव की खबरों से अटे पड़े हैं.
'कनाडा-भारत दोनों ही रिश्ते सुधारने की जल्दी में नहीं'
कनाडा के एक अखबार 'नेशनल पोस्ट' ने दोनों देशों के बीच तनाव को दिखाने के लिए 'राजनयिक युद्ध' शब्द का इस्तेमाल किया है. अखबार ने लिखा, 'कनाडा, भारत के साथ कम से कम कूटनीतिक रूप से युद्ध में है.
अखबर ने लिखा, 'यह वही भारत है, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध में कनाडा के साथ मिलकर जापानियों और जर्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी; एक लोकतंत्र और राष्ट्रमंडल का सदस्य जो चीन जैसे देशों के खिलाफ एक सहयोगी है. फिर भी, दोनों देशों के बीच संबंध बद से बदतर होते चले गए हैं और दोनों में से कोई भी सरकार रिश्ते सुधारने की जल्दी में नहीं दिख रही है.'

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