
'भारत पीछे नहीं हटा तो ट्रंप भी कोई रियायत नहीं देंगे...', अमेरिकी सलाहकार केविन हैसेट की चेतावनी
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व्हाइट हाउस के सलाहकार हैसेट ने भारत पर अपने बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए न खोलने की जिद का आरोप लगाया. इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने द्विपक्षीय संबंधों पर बात करते हुए कहा कि यह रिश्ते जटिल जरूर हैं, लेकिन उन्हें भरोसा है कि अंततः दोनों देश एक साथ आएंगे.
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनातनी एक बार फिर बढ़ गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निर्यात होने वाले सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया है. इस बीच अमेरिका की नेशनल इकनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर और व्हाइट हाउस के सलाहकार केविन हैसेट ने कहा है कि अगर भारत ने अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार नहीं खोला, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना रुख नरम नहीं करेंगे.
हैसेट ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि अगर भारत पीछे नहीं हटता है तो मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति ट्रंप भी कोई रियायत देंगे. उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत पर अपने बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए न खोलने की जिद का आरोप लगाया और संकेत दिया कि अगर भारत ने पीछे हटने से इनकार किया तो राष्ट्रपति ट्रंप अपना रवैया और कड़ा कर सकते हैं.
हैसेट ने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक जटिल रिश्ता है. इसका एक हिस्सा रूस पर दबाव डालने की हमारी कोशिश से जुड़ा हुआ है, ताकि शांति समझौता हो सके और लाखों जानें बचाई जा सकें. और फिर भारत का अपने बाजार खोलने में अडियल रवैया भी इसमें शामिल है."
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (US Customs and Border Protection) ने पुष्टि की कि भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ बुधवार से 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं. अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के 6 अगस्त के कार्यकारी आदेश (Executive Order) के बाद यह कदम उठाया गया है. इसके पीछे का कारण भारत का रूसी तेल खरीदना और व्यापार समझौते में देरी बताया गया है.
हैसेट ने बातचीत को लंबी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि धैर्य को कमजोरी न समझा जाए. जब आप व्यापार वार्ताओं को देखते हैं, तो एक सबक यह है कि आपको हमेशा लंबी दूरी पर नजर रखनी होती है और यह समझना होता है कि अंतिम समझौते से पहले उतार-चढ़ाव आते रहेंगे.
अमेरिकी वित्त मंत्री ने भारत के साथ समझौते की संभावना जताई

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