
बीजेपी ने दुनिया की 25 पार्टियों को भेजा न्योता, लेकिन इन देशों को रखा लिस्ट से बाहर
AajTak
भारतीय जनता पार्टी ने लगभग 25 वैश्विक पार्टियों को लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान को ऑब्जर्व करने के लिए बुलाया है. हालांकि, अभी तक सिर्फ 13 पार्टियों ने भारत आने की पुष्टि की है. अमेरिका की दोनों पार्टियों सत्तारूढ़ डेमोक्रेट और विपक्षी रिपब्लिकन में से किसी को भी नहीं बुलाया गया है.
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर देश की राजनीतिक पार्टियां जोर-शोर से चुनाव की तैयारियों में लगी हुई हैं. अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और कांग्रेस पार्टी के अकांउट फ्रीज होने के आरोप के बीच हो रहे इस चुनाव पर दुनियाभर की नजर है. अमेरिका, जर्मनी और यूएन ने भी आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर टिप्पणी की है.
इसी बीच भारत की सत्तारूढ़ पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी ने 25 से अधिक वैश्विक पार्टियों को लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान को देखने के लिए बुलाया है. भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, इनमें से 13 पार्टियों ने भारत आने की पुष्टि की है. अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के कई देशों और कई दलों के नेता भाजपा के बुलावे पर आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान भारत आएंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की दोनों पार्टियों सत्तारूढ़ डेमोक्रेट और विपक्षी रिपब्लिकन में से किसी को भी नहीं बुलाया गया है. अमेरिकी पार्टियों को नहीं बुलाए जाने पर बीजेपी के एक नेता ने अखबार से बात करते हुए कहा है कि अमेरिकी पार्टियां एक तो अपने राष्ट्रपति चुनाव में व्यस्त हैं. इसके अलावा, अमेरिकी पार्टियों का स्ट्रक्चर भारत या यूरोपीय देशों की पार्टियों की तरह नहीं है. अमेरिका में एक पार्टी कार्यकर्ता को अपनी पार्टी के अध्यक्ष तक का नाम नहीं पता हो सकता है. क्योंकि वहां का सिस्टम केवल राष्ट्रपति या अमेरिकी कांग्रेस के कार्यालय को ही प्रमुख बनाता है.
ब्रिटेन-जर्मनी की पार्टियों को बुलावा
हालांकि, भाजपा ने ब्रिटेन की कंजर्वेटिव और लेबर पार्टियों को बुलाया है. साथ ही जर्मनी की क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स और सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी को भी बुलाया है. जर्मनी को बुलावा इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद भारत में चुनाव को लेकर सबसे पहले टिप्पणी जर्मनी ने ही की थी.
पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ खराब संबंधों को देखते हुए वहां के किसी भी राजनीतिक दल को नहीं बुलाया गया है. इसके अलावा, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) को भी नहीं बुलाया गया है. वहीं, बांग्लादेश से केवल सत्तारूढ़ शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग को बुलाया गया है. बांग्लादेश के प्रमुख विपक्षी पार्टी बीएनपी को नहीं बुलाया गया है क्योंकि बीएनपी समेत अन्य विपक्षी पार्टियां भारतीय वस्तुओं के बहिष्कार के लिए सोशल मीडिया कैंपेन 'इंडिया आउट' चला रही है.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








