
बिलकिस बानो मामला: सरकार से कोर्ट के सख़्त सवाल
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बिलकिस मामले में रिहाई की फाइल कोर्ट को क्यों नहीं दिखा रही सरकार, उन्नाव गैंगरेप के पीड़िता को अब तक न्याय क्यों नहीं मिल पाया और क्यों लिवर डिजीज एक संक्रामक रोग की तरह फैलता जा रहा है? सुनिए 'आज का दिन' में.
भारत में महिलाओं की स्थिति बड़ी विरोधाभासी है. एक ओर सरकार से लेकर समाज उन्हें नारी शक्ति, शील, सदाचार की मूर्ति बताता है. दूसरी तरफ़, हिंसा, बलात्कार से लेकर महिलाओं के साथ होने वाले अपराध की कहानी अंतहीन है. हर मामला अपने आप में अलग होता है, लेकिन इसका एक क्लासिक एग्जाम्पल है, बिलकिस बानो केस. वो मामला जब 2002 गुजरात दंगों के दौरान पांच महीने की गर्भवती बिलकिस पानो का गैंगरेप हुआ. साथ ही, दंगाइयों ने उनके परिवार की हत्या कर दी. घटना के जो 11 दोषी जेल में बंद थे, उम्रकैद की सज़ा काट रहे थे, पिछले साल गुजरात सरकार ने उनको रिहा कर दिया.
इस रिहाई के ख़िलाफ़ ही देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई चल रही है. मामले को सुन रही जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने कल गुजरात सरकार पर बेहद तल्ख़ टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा केंद्र सरकार ने राज्य के फैसले के साथ सहमति अगर जता दी तो इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार अपना दिमाग लगाए ही न! जस्टिस केम जोसेफ ने कहा कि आज बिलकिस बानो है. कल आप और मुझमें से कोई भी हो सकता है. कल कोर्ट के अंदर सुनवाई के दौरान क्या क्या हुआ, किस ओर ये केस अब यहां से आगे बढ़ रहा है, ये जो गुजरात सरकार ने रिहाई से जुड़ी फाइल दिखाने के आदेश का विरोध किया है, वो क्यों? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
------------------------------------------- अब चलिए उत्तर प्रदेश. यहां कानपुर से दो घण्टे की दूरी गाड़ी से तय करने के बाद आप पहुंचेंगे उन्नाव के मौरावां थाना क्षेत्र में. यहां के एक गांव में एक बच्ची रहती है जिसकी उम्र मुश्किल से 12 बरस से कुछ अधिक होगी, इस बच्ची का साल 2021 के 31 दिसंबर और साल 2022 के 13 फ़रवरी को दो बार गैंगरेप हुआ, बाद में उल्टियां हुईं, कम्पाउन्डर ने पेट ख़राब होने की दवा दे दी, लड़की गर्भवती हो चुकी थी, लड़की जो अब पीड़िता कहकर पुकारी जाती है, उसका एक छोटा सा बच्चा है. वो न्याय के लिए, प्रशासन का दरवाजा खटखटाती रहती है, पांच आरोपियों को कठोर सज़ा हो, इसके लिए उसका जद्दोजहद जारी है. लेकिन बात इतनी भर नहीं.
परसो सोमवार को इस पीड़िता के घर पर हमला हुआ, पीड़ित पक्ष का कहना है कि गैंगरेप के आरोपियों ने ही ये हमला किया, घर पर आग लगा दिया गया जिसमें उस नाबालिग लड़की का लगभग 5 महीने का बच्चा बुरी तरह से झुलस गया. हालांकि पुलिस का इस पर दूसरा पक्ष है. इस हालिया विवाद से जुड़ी जानकारी क्या है, इस घटना पर कार्रवाई क्यों उस तरह से नहीं हो सकी, जैसा पीड़ित पक्ष मांग करता रहा है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. -------------------------------------------- आज है वर्ल्ड लिवर डे. लिवर जिसे जिगर भी कहते हैं, शरीर में इंजन की तरह काम करता है, प्रोटीन बनाने से लेकर ग्लाईकोजेन स्टोर करने तक 500 से अधिक ज़रूरी फ़ंक्शंस इसके जिम्मे है. लेकिन एक दूसरी हक़ीक़त भी है लिवर से जुड़ी और वो ये की भारत में लिवर डिजीज एक संक्रामक रोग बनता जा रहा है. देश में हर पांचवा आदमी लिवर से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहा है. दुनियाभर में 20 लाख लोग हर साल लिवर डिजीज से मर जाते हैं. और इन मरने वाले लोगों में तकरीबन 20 प्रतिशत भारतीय होते हैं. क्या वजह है जो लिवर एक एंडेमिक, संक्रामक बीमारी बनता जा रहा है, क्या सिर्फ शराब पीने से ही लिवर ख़राब होता है और किन बातों पर ध्यान देकर हम ये जान सकते हैं कि हमारा लिवर ठीक तरीके से काम कर रहा है या नहीं? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.

आज बात पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दंगल की जहां टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है. बंगाल की सियासत इस वक्त अपने चरम पर है, जहां हर बयान, हर कदम और हर मंच चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है. कल ईद के मौके पर मंदिर -मस्जिद का रंग देखने को मिला. ममता बनर्जी ने कोलकाता में ईद के मौके पर बीजेपी के घुसपैठिए वाले मुद्दे पर अबतक का सबसे बड़ा पलटवार किया. ईद-उल-फितर के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम में ममता ने पीएम मोदी को सबसे बड़ा घुसपैठिया बता दिया. ये वही मुद्दा है जिस पर पीएम मोदी लगातार ममता सरकार को घेर रहे हैं. ममता के बयान पर बीजेपी ने हार की हताशा में दिया गया बयान बताया. वहीं बीजेपी ने भी बंगाल में अपने वोटरों को मैसेज दिया है. शुभेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और मां काली से आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि बंगाल में घुसकर बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बहुत अत्याचार किया है. बंगाल में अगले महीने दो चरण में वोटिंग होनी है. ऐसे में जैसे-जैसे तारीख नजदीक आएगी, बयान और भी तीखे होंगे और सियासी चालें और भी पेचीदा. लेकिन सवाल ये कि क्या बंगाल मंदिर-मस्जिद की राजनीति से बाहर निकल पाएगी. इस बार बंगाल में किस पार्टी की नैरेटिव का सिक्का चलेगा. बीजेपी-टीएमसी की आमने-सामने की लड़ाई में आखिर कांग्रेस और कभी 34 साल तक लगातार सरकार में रहने वाली लेफ्ट क्या कर रही है.

दिल्ली में जद (यू) के पूर्व नेता केसी त्यागी ने रविवार को राष्ट्रीय लोक दल जॉइन कर लिया. उन्होंने जयंत चौधरी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. इससे पहले मंगलवार को उन्होंने बिना कारण बताए जद (यू) से इस्तीफा दिया था. 2003 से पार्टी से जुड़े त्यागी महासचिव, प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं.

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